चतुर खरगोश और शेर – पंचतंत्र की कहानी (The Cunning Hare And The Lion Story In Hindi)

चतुर खरगोश और शेर – पंचतंत्र की कहानी (The Cunning Hare And The Lion Story In Hindi)

दोस्तों, पंचतंत्र की कहानियां (Tales of Panchatantra in Hindi) श्रृंखला में आज हम – चतुर खरगोश और शेर की कहानी (Panchatantra Story The Cunning Hare And The Lion In Hindi) पेश कर रहे हैं। Khargosh Aur Sher Ki Kahani में बताया गया है की बुद्धि शक्ति से बड़ी होती है। उसके बाद क्या होता है? यह जानने के लिए पढ़ें – Chatur Khargosh Aur Sher Panchtantra Story In Hindi

The Cunning Hare And The Lion Story In Hindi – Tales of Panchatantra

चतुर खरगोश और शेर – पंचतंत्र की कहानी (The Cunning Hare And The Lion Story In Hindi)
Chatur Khargosh Aur Sher Panchtantra Story In Hindi

एक जंगल में एक बहुत बड़ा शेर रहता था। जब वह शिकार के निकलता था तो वह जंगल के कई जानवरों को बेवजह ही मार देता था। इससे जंगल के सभी जानवर दुखी और भयभीत हो गए थे।

एक दिन इस समस्या का हल सोचने के लिए जंगल के सभी प्राणी एक साथ इकट्ठे हुए। सभी जानवरों ने मिलकर इस समस्या से निजात पाने का उपाय सोचा कि उनका दल महाराज के पास जाकर उनसे विनती करेगा।

तय के अनुसार दूसरे दिन पशुओं का एक दल महाराज के पास गया। जानवरों के एक समूह को अपनी गुफा की ओर आते देख शेर जोर से दहाड़ा और बोला “क्या बात है? तुम सब यहां क्यों आ रहे हो?”

दल के मुखिया ने कहा, “महाराज, हम सब आपकी प्रजा हैं, आप हमारे राजा हैं। जब आप शिकार करने निकलते हैं तो आप कई जानवरों को अनावश्यक रूप से मार देते हैं, जिससे हमारी संख्या बहुत कम होती जा रही है। और अगर ऐसे ही चलता रहा तो हम सब जीव थोड़े ही दिनों में खत्म हो जाएंगे। उसके पश्चात इस जंगल में केवल आप ही अकेले प्राणी रह जाएंगे।

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बिना प्रजा के राजा किस काम के, हम तो आपको हमेशा राजा ही देखना चाहते हैं। अतः हम सब आपसे निवेदन करते हैं कि आप अपनी गुफा में ही रहें। हम रोज आपके भोजन के लिए एक-एक प्राणी को आपके पास भेजते रहेंगे।”

शेर ने कुछ देर सोचा और बोला, “मुझे तुम सबकी बात मान लेनी चाहिए, लेकिन मेरी एक शर्त है, अगर किसी दिन तुम सब मिलकर मेरे खाने के लिए पर्याप्त जानवर नहीं भेजोगे, तो मैं जितने चाहे उतने जानवरों को मार डालूंगा।”

शेर की शर्त मानने के अलावा जानवरों के पास कोई चारा नहीं था। इसलिए उन्होंने महाराज की शर्त मान ली। उस दिन के बाद जंगल के सभी जानवरों में से एक-एक जानवर को बारी-बारी से चुना जाता था और प्रतिदिन शेर के पास उसका भोजन बनने के लिए भेजा जाने लगा।

एक दिन एक नन्हें खरगोश की बारी आई। वह खरगोश शरीर से तो बहुत छोटा था लेकिन उसके पास असाधारण बुद्धि थी। उसने सोचा वैसे भी आज तो मरना ही है, तो क्यों न कुछ उपाय किया जाए जिससे उसकी जान बच जाए।

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कुछ देर सोचने के बाद उसके दिमाग में एक उपाय आया। खरगोश धीरे-धीरे शेर की मांद की ओर चल पड़ा। जब तक वह गुफा में पहुंचा, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। भूख के मारे शेर का बुरा हाल था।

खरगोश को देखते ही शेर ने जोर से दहाड़ा और बोला, “तुमने आज आने में इतनी देर क्यों कर दी और इतने से खाने से मेरा क्या होगा। जिसने भी तुम्हें यहां भेजा है, मैं उन सबको एक-एक करके देख लूंगा। एक तो समय पर भोजन नहीं भेजा और भेजा भी तो इतना छोटा जीव मेरे लिए भेज दिया।”

खरगोश ने विनम्रतापूर्वक सिंह को प्रणाम किया और कहा, “महाराज, जंगल के सभी जानवरों ने मिलकर आपके लिए पांच खरगोश भेजे थे और हम सभी समय पर आपके पास आने वाले थे, लेकिन रास्ते में एक और शेर ने हमें रोक लिया और मेरे चार साथियों को मारकर खा लिया। वह मुझे भी खाने ही वाला था पर मैंने उसके सामने आपका जिक्र कर दिया कि हमारे महाराज तुम्हें नहीं छोड़ेंगे, तुमने उनका भोजन खा लिया है।”

शेर हंसा और जवाब दिया, “मैं इस जंगल का अकेला राजा हूं। कोई दूसरा शेर राजा नहीं हो सकता है।” 

खरगोश ने कहा, “उसने मुझे आपको अपने सामने ले जाने के लिए भेजा है।”

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महाराज ने जोर से गर्जना की और उन गर्जना से सारा वन कांप उठा।

शेर – “दूसरा शेर? वह कौन है? इस जंगल का राजा मैं हूं। वह दूसरा शेर कहां है? मुझे उसके पास ले चलो, मैं उसके टुकड़े-टुकड़े कर दूंगा।”

खरगोश सिंह को एक कुएं के पास ले गया और बोला, “जब हम आपके पास आ रहे थे, तो वह शेर यही था, लगता है कि शेर आपको देखकर इस गुफा में छिप गया है। महाराज सावधान, कुएं में छिपा हुआ शत्रु खतरनाक होता है।”

शेर ने जब कुएं के अंदर झांका तो उसे पानी में अपनी परछाई दिखाई दी। शेर ने सोचा कि अवश्य ही यह दूसरा शेर होना चाहिए। शेर ने सोचा कि शायद वह दूसरा शेर यही है।

उसे देखकर जब महाराज शेर ने दहाड़ लगाई तो कुएं में दहाड़ जोर से गूंजी। शेर ने सोचा कि दूसरा शेर मुझे लड़ाई के लिए ललकार रहा है।

शेर ने आव देखा ना ताव और झपट्टा मारने के लिए कुएं में कूद गया। छलांग लगाते ही शेर कुएं की दीवार से टकराकर पानी में गिर गया। कुछ देर छट-पटाने के बाद शेर की मौत हो गई।

शेर की मौत की खबर पूरे जंगल में आग की तरह फैल गई। और सारे जानवर मिलकर खरगोश की जय-जयकार करने लगे।

कहानी का भाव:

हमें किसी भी स्थिति में चतुराई से काम लेना चाहिए।

Khargosh aur Sher ki Kahani

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