सेंधा नमक: खोज, उत्पत्ति, इतिहास और पूरी जानकारी. – Rock salt: discovery, origin, history and complete information.

Rock salt: discovery, origin, history and complete information. सेंधा नमक: खोज, उत्पत्ति, इतिहास और पूरी जानकारी.

नमक आमतौर पर भोजन में इस्तेमाल होने वाले नमक को इंगित करता है. आपने अक्सर सुना होगा – अगर खाने में नमक नहीं है तो यह स्वादिष्ट नहीं है. नमक के कई सारे प्रकार पाए जाते है, जैसे की सामान्य नमक (Table Salt) काला नमक (Black Salt) सेंधा नमक (Himalayan Pink Salt) धुएं वाला नमक (Smoked Salt) समुद्री नमक (Sea Salt) ई. 

सभी प्रकार के नमक के अपने कुछ विशेष गुणधर्म और विशेषताएं होते हैं. सेंधा नमक, नमक के सभी प्रकारों में सबसे अच्छा माना जाता है. आयुर्वेद के अनुसार इसे रोजाना इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है. यह अपने गुणों, उपयोगों और स्वास्थ्य लाभों के कारण आम नमक से काफी अलग है. आज हम ‘सेंधा नमक’ के उत्पादन के बारे में जानकारी साझा करने जा रहे हैं. 

‘सेंधा नमक’, जिसे ‘सेंधव नमक’ या ‘लाहौरी नमक’ भी कहा जाता है, एक खनिज पदार्थ है जो प्राकृतिक रूप से स्फटिक रूप में पाया जाता है. यह अक्सर रंगहीन या सफेद होता है, हालांकि कभी-कभी इसका रंग अन्य पदार्थों की उपस्थिति के कारण हल्का नीला, गाढ़ा नीला, बैंगनी, गुलाबी, नारंगी, पीला या भूरा हो सकता है.

काला नमक भी एक प्रकार का सेंधा नमक है जिसका उपयोग भारतीय भोजन और औषधि में पाचन के लिए किया जाता है. आयुर्वेद में, इसे स्वास्थ्य वर्धक कहा जाता है, दैनिक भोजन में इसका उपयोग कई शारीरिक बीमारियों की रोकथाम में सहायक माना जाता है.

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ऐतिहासिक रूप से, ‘सेंधा नमक’ उत्तर भारतीय उपमहाद्वीप के सिंध, पश्चिमी पंजाब के सिंधु नदी के कुछ हिस्सों और खैबर-पख्तूनख्वा के ‘कोहाट’ जिले से आता था जो अब पाकिस्तान में हैं और जहां यह जमीन में पाया जाता है. ‘सेंधा नमक’ और ‘सेंधव नमक’ का अर्थ है ‘सिंध या सिंधु के क्षेत्र से आया हुआ’. इस नमक को ‘लाहौरी नमक’ भी कहा जाता है क्योंकि यह अक्सर लाहौर से होता हुआ पूरे उत्तरी भारत में बेचा जाता था.

‘नमक कोह’ या ‘नमक सार’ का मतलब है ‘नमक के पहाड़’ जो पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के उत्तरी भाग में स्थित एक पर्वत श्रृंखला है. ‘सेंधा नमक’ की सबसे बड़ी खदान पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में है और इस खदान को ‘खेवड़ा नमक’ खदान के रूप में जाना जाता है. 

‘खेवड़ा नमक’ खदान दुनियां की दूसरी सबसे बड़ी नमक की खदान है. ‘सेंधा नमक’ की यह खदान काफी प्रसिद्ध है, जिसके कारण हजारों पर्यटक इसे देखने जाते हैं. ‘खेवड़ा नमक’ खदान पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से 160 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है. 

यहां से नमक की आपूर्ति अगले 500 वर्षों तक की जा सकती है. इस पहाड़ में सुरंग बनाकर नमक निकाला जाता है. ‘खेवड़ा खदान’ में करीब 40 किलोमीटर लंबी सुरंग है जिससे निकलने वाला नमक पूरे उत्तर भारतीय महाद्वीप में आता है. 

नमक निकालते समय, इस बात का ध्यान रखा जाता है की सिर्फ 50 फीसदी ही नमक निकाला जाये और 50 फीसदी छोड़ दिया जाय, ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि अंदर पथरीली दीवारों और खंबों के रूप में नमक की खानों की संरचना को सहारा मिलता रहे.

अभी तक इस खदान से इतना नमक निकाला जाता रहा है कि इसमें कमरे बनाए गए हैं. अगर इसकी गहराई का अनुमान लगाया जाए तो यह 19 मंजिला इमारत जितनी गहरी है और अगर सुरंगों की गहराई नापी जाए तो यह लगभग 730 मीटर लंबी होगी.

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यह खदान पर्यटकों के लिए भी मुख्य आकर्षण है, इस नमक की खदान को रोशनी से रोशन किया गया है. 

खदान के अंदर नमक से बनी सामग्री को रखा गया है. यहां सेंधा नमक से आकर्षक चीजें बनाई गई हैं, जो पर्यटकों को दिखाई जाती हैं.

पर्यटकों के लिए, इस नमक की खान का मुख्य आकर्षण 300 फीट ऊंचा असेंबली हॉल है, जिसमें नमक की 300 सीढ़ियां हैं, और 3000 वर्ग फीट में निर्मित मस्जिद भी है.

इस खदान में जमीन के अंदर खारे पानी के तालाब के ऊपर 25 फीट लंबा नमक का पुल बनाया गया है. चाइना वाल की एक छोटी प्रतिकृति भी बनाई गई है.

खेवड़ा नमक की खान के बारे में कहा जाता है कि इसे अनजाने में खोजा गया था. एक मान्यता के अनुसार, जब सिकंदर ने भारत पर आक्रमण किया, तो उसके सैनिक खेवड़ा क्षेत्र में आए, सिकंदर के घोड़े दीवार को चाटने लगे जिसके बाद पाया गया कि यहां की पूरी पहाड़ियों पर नमक है. 

‘The Kingdom of Salt’ के नाम से मशहूर खेवड़ा झेलम जिले का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला शहर है. भारत में सेंधा नमक का सबसे बड़ा स्रोत हिमाचल प्रदेश की मंडी है. इसके अलावा, राजस्थान की संभल झील से भी देश में बहुत सारा नमक आता है.

अगर हम दुनिया की सबसे बड़ी नमक की खान के बारे में बात करते हैं, तो यह गौरव ओंटारियो में स्थित Sifto Salt Mines को दिया जाता है.

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