पर्यावरण प्रदूषण किसे कहते है? पर्यावरण प्रदूषण के विभिन्न प्रकार क्या हैं?

What is environmental pollution in hindi

What is environmental pollution and its types in Hindi – प्रकृति ने इस पृथ्वी का निर्माण इस प्रकार किया है कि इस पर जीवन संतुलित रूप से चलता रहता है. पृथ्वी का संतुलन बनाने में हवा, पानी, जमीन, वनस्पति, पशु-पक्षी और पेड़-पौधों के साथ-साथ मनुष्यों का भी अहम योगदान है.

लेकिन मनुष्य के स्वार्थी हस्तक्षेप के कारण पृथ्वी पर असंतुलन पैदा हो गया है, जिससे पर्यावरण प्रदूषण (Environmental pollution) जैसी भयानक स्थिति उत्पन्न हो गई है, जो हम मनुष्यों के साथ-साथ अन्य प्राणियों के लिए भी खतरे की घंटी है.

पिछले कुछ दशकों की तुलना में आधुनिक युग में पर्यावरण को होने वाला नुकसान अधिक है. जहां पहले धरती पर पेड़, पौधे, खेत और जलस्रोतों की संख्या ज्यादा थी, अब उनकी जगह बड़े-बड़े घरों, उद्योगों और कारखानों ने ले ली है.

मानव महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए अधिक से अधिक वनों को काटा जा रहा है और वहां बस्तियां बसाई जा रही हैं, जिससे पर्यावरण को बहुत नुकसान हो रहा है. पहले की तुलना में सड़कों पर वाहनों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हुई है, यह भी पर्यावरण प्रदूषण का एक बड़ा कारण है.

गांव हो या महानगर, हमारे आसपास का वातावरण लगातार प्रदूषित हो रहा है और हवा के साथ-साथ जल प्रदूषण का स्तर भी तेजी से बढ़ रहा है. इन सबके अलावा हर तरफ कचरे की बदबू और तेज आवाज वाली मशीनों की आवाजें लगातार पर्यावरण को प्रदूषित करने का काम कर रही हैं.

आपको पता होना चाहिए कि इन सभी अप्राकृतिक गतिविधियों के कारण स्वास्थ्य से जुड़ी कई नई और पुरानी बीमारियां व्यापक रूप से फैल रही हैं. हाल ही में आई कोरोना महामारी (Corona pandemic) नामक खतरनाक बीमारी से हम सभी अच्छी तरह वाकिफ हैं जिसने पूरी दुनिया को जकड़ कर रख दिया था.

इसके लिए पृथ्वी पर जीवन के स्वास्थ्य, विकास और अस्तित्व को बनाए रखने के लिए हम सभी को नई और रचनात्मक सोच के साथ स्थायी समाधान खोजने की जरूरत है.

इसके लिए हम इस लेख में पर्यावरण प्रदूषण से उत्पन्न होने वाली समस्याओं और उनकी रोकथाम से जुड़े ऐसे ही उपायों के बारे में चर्चा करेंगे.

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प्रदूषण पर निबंध – Pollution Essay in Hindi

पर्यावरण प्रदूषण और इसके प्रकार – Environmental pollution and its types in Hindi

आइए पहले एक नजर डालते हैं और समझने की कोशिश करते हैं कि प्रदूषण किसे कहते है?

प्रदूषण क्या है? What is pollution in Hindi

शायद आपके मन में भी यह सवाल जरूर आया होगा कि प्रदूषण का मतलब क्या है? अथवा प्रदूषण किसे कहते है?

तो उत्तर यह है कि ऐसे अवांछित और हानिकारक पदार्थ जो किसी भी प्रकार के पर्यावरण संतुलन के प्रतिकूल होते हैं और इसकी खराब स्थिति के लिए जिम्मेदार होते हैं, वह प्रदूषक तत्व (Pollutant elements) कहलाते हैं और उनके द्वारा उत्पन्न प्रतिकूल परिस्थितियों को प्रदूषण (Pollution) कहा जाता है. 

अथवा पर्यावरण के किसी तत्व में वह परिवर्तन, जिसका पृथ्वी पर उपस्थित जीवों पर बुरा प्रभाव पड़ता हो, वह प्रदूषण कहलाता है. पर्यावरण में उपस्थित हानिकारक जीवन-नाशक तथा विषैले पदार्थ एकत्रित होकर उसे प्रदूषित करते हैं. जब वातावरण में कोई पदार्थ सामान्य से अधिक हो जाता है तो वह पर्यावरण को दूषित करने का कार्य करता है, ऐसी स्थिति में प्रदूषण फलता-फूलता हैं.

प्रदूषण के लिए उत्तरदायी ये पदार्थ प्रदूषक (Pollutant) कहलाते हैं. ये प्रदूषक प्राकृतिक हो सकते हैं, जैसे कि ज्वालामुखीय राख और गैसें, और मानव गतिविधियों द्वारा भी उत्पादित किए जा सकते हैं, जैसे कारखानों से अपशिष्ट या जहरीले तरल पदार्थ. ये प्रदूषक हवा, पानी और जमीन की नैसर्गिक गुणवत्ता को हानि और नुकसान पहुंचाते हैं.

जब नदियों, तालाबों तथा अन्य पेयजल स्रोतों में स्थित जल दूषित हो जाता है तो उसे जल प्रदूषण (Water pollution) कहते हैं. यह न केवल जल में रहने वाले जीवों के लिए बल्कि मनुष्यों और अन्य प्राणियों के लिए भी असुरक्षित हो जाता है.

इसी प्रकार अत्यधिक धुएं और धूल के कारण हमारे चारों ओर की वायु प्रदूषित हो जाती है, इसे वायु प्रदूषण (Air pollution) कहते हैं. हवा के दूषित होने से सांस लेने में दिक्कत होती है, जिसका स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है. 

ऐसी कई चीजें हैं जो हमारे लिए उपयोगी तो हैं लेकिन प्रदूषण का कारण बनती हैं. आप जानते ही होंगे कि कारखानों और चिमनियों से निकलने वाले धुएं के कारण हवा में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ता है.

कार में इस्तेमाल होने वाले ईंधन से निकलने वाला धुआं, बिजली बनाने में इस्तेमाल होने वाले कोयले का धुआं, कारखानों और घरों से निकलने वाला कचरा और सीवेज, कीड़ों को मारने वाले खरपतवार और जहरीले रसायन आदि.

उद्योगों और कृषि में प्रयोग होने वाले हानिकारक रसायनों से मिट्टी भी प्रदूषित (Soil pollution) होती है, इसके अतिरिक्त अत्यधिक शोर भी पर्यावरण (Sound pollution) को प्रदूषित करने का काम करता है.

पृथ्वी पर सभी जीवित प्राणी, चाहे जमीन पर हों या पानी में, हवा और पानी पर निर्भर हैं. जब ये सभी संसाधन प्रदूषित होते हैं तो पृथ्वी पर जीवन के लिए खतरा बढ़ जाता है.

प्रदूषण हमारी धरती की एक गंभीर समस्या है, इसलिए अगर जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो हमारी यह खूबसूरत धरती इंसानों के रहने लायक नहीं रह जाएगी.

प्रदूषक किसे कहते है? What is a pollutant in Hindi

ऐसे रासायनिक या जैविक पदार्थ जो जल, वायु, भूमि या अन्य प्राकृतिक संसाधनों को हानि पहुंचाकर उन्हें दूषित करते हैं, प्रदूषक (Pollutant) कहलाते हैं.

प्राकृतिक या मानवीय गतिविधियों के कारण पर्यावरण में छोड़े गए खतरनाक प्रदूषक पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं.

प्रदूषण के दुष्प्रभाव – Pollution side effects in Hindi

प्रदूषण ने एक वैश्विक समस्या का रूप ले लिया है. हालांकि शहरी क्षेत्र ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में अधिक प्रदूषित हो गए हैं. 

ऐसा नहीं है कि प्रदूषण केवल मानव आवास तक ही सीमित है, प्रदूषण उन जगहों पर भी दूर-दूर तक फैल सकता है जहां लोग नहीं रहते हैं. वायु और जल का प्रवाह अपने साथ प्रदूषण भी ले जाता है.

उदाहरण के लिए, अंटार्कटिका की बर्फ की चादर में कीटनाशक और अन्य जहरीले रसायन पाए गए हैं. उत्तरी प्रशांत महासागर के मध्य में सूक्ष्म प्लास्टिक कणों के एक विशाल ढेर को “Great Pacific Garbage Patch” के रूप में जाना जाता है.

समुद्र की लहरें और जलीय जीव एक स्थान से दूसरे स्थान पर प्रवास करके अपने साथ समुद्री प्रदूषकों को दूर-दूर तक फैलाते हैं. परमाणु रिएक्टर से अचानक निकलने वाले रेडियोधर्मी पदार्थ हवा के साथ ऊपर उठते हैं और पूरी दुनिया में फैल जाते हैं.

इसी प्रकार किसी कारखाने से निकलने वाला धुंआ एक देश से दूसरे देश तक पहुंच जाता है. यह प्रदूषण मानव और प्राणियों सहित पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान पहुंचाता है.

प्रदूषण के प्रकार – Types of Pollution in Hindi

देखा जाए तो पर्यावरण प्रदूषण (Environmental pollution) कई प्रकार के होते हैं लेकिन प्रदूषण को मोटे तौर पर चार प्रमुख प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है: 1) वायु प्रदूषण (Air pollution), 2) जल प्रदूषण (Water pollution), 3) भूमि प्रदूषण (Land pollution) और 4) ध्वनि प्रदूषण (Noise pollution). 

जल, वायु, मिट्टी मुख्य रूप से प्राकृतिक संसाधनों में आते हैं. मनुष्य की प्रकृति विरोधी गतिविधियों के कारण पर्यावरण के इन संसाधनों पर संकट खड़ा हो गया है.

वायु प्रदूषण क्या है? Air pollution in Hindi

What is air pollution in hindi
What is air pollution in Hindi

वायु में विषैली गैसों तथा धूलकणों जैसे प्रदूषकों की वृद्धि वायु प्रदूषण (Air pollution) कहलाती है. अन्य प्रदूषणों की तुलना में वायु प्रदूषण का प्रभाव तुरंत दिखाई देता है.

जैसा कि हमने स्कूल में पढ़ा है कि ऑक्सीजन यानि प्राणवायु जीवों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, न केवल मानव जीवन बल्कि दुनिया के सभी जीवित प्राणियों के लिए ऑक्सीजन एक आवश्यक घटक है.

हम इंसान श्वास द्वारा प्राणवायु को ऑक्सीजन (Oxygen) के रूप में शरीर के अंदर लेते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड (Carbon dioxide) को बाहर छोड़ते है. जबकि यही प्रक्रिया पेड़-पौधों में उलटी होती है, वे दिन में कार्बन डाइऑक्साइड लेते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं.

हवा में बढ़ते प्रदूषण के कारण सांस लेना मुश्किल और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो गया है. ग्रीन हाउस प्रभाव के कारण वातावरण में हानिकारक जहरीली गैस कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ रही है.

हमारे वायुमंडल में गैसों का एक संतुलन है, जिसमें सभी गैसों की एक निश्चित मात्रा होती है, लेकिन वायु प्रदूषण के कारण CO2 दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है. पृथ्वी के वायुमंडल में अत्यधिक मात्रा में हानिकारक प्रदूषक जैसे धूल और मिट्टी के कण, रसायन और अन्य सूक्ष्म जीव आदि जमा हो गए हैं.

वायु प्रदूषण के स्रोत (Sources of air pollution in Hindi):

यदि वास्तविक सच्चाई को देखा जाए तो वायु प्रदूषण का मुख्य कारण स्वयं मनुष्य ही है. वायु प्रदूषण का मुख्य कारण मनुष्य की कई अप्राकृतिक गतिविधियां हैं, इसलिए इन पर विशेष ध्यान देना अति आवश्यक हो गया है. 

वायु प्रदूषण जैसे वाहनों से निकलने वाला धुआं, कारखानों की चिमनियों से निकलने वाला प्रदूषित धुआं, पटाखों का जलना और कोयले का धुआं आदि के कारण कई क्षेत्रों में जहरीले पदार्थ फैलते हैं. वर्तमान समय में बढ़ते औद्योगीकरण के कारण वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ा है.

कारों और कारखानों से निकलने वाले धुएं में नाइट्रोजन ऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड, और हाइड्रोकार्बन जैसे प्रदूषक शामिल होते हैं. ये रसायन सूरज की रोशनी के साथ प्रतिक्रिया करते हैं और हवा में धुंध या घना कोहरा पैदा करते हैं.

प्रदूषण के लिए ग्रीन हाउस गैसें भी जिम्मेदार हैं. वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसी ग्रीनहाउस गैसें प्राकृतिक रूप से मौजूद हैं. लेकिन जीवाश्म ईंधन के अत्यधिक उपयोग और वनों की कटाई के कारण वातावरण में इन गैसों की मात्रा काफी बढ़ रही है, परिणामस्वरूप पूरे विश्व में औसत तापमान भी बढ़ रहा है.

दुनिया भर में मानव गतिविधियों के कारण औसत तापमान में वृद्धि को ग्लोबल वार्मिंग (Global warming) कहा जाता है.

Chlorofluorocarbons (CFCs) वायु प्रदूषण का एक खतरनाक रूप है. यह रसायन रेफ्रिजरेटर, फोमिंग उत्पादों और एयरोसोल के डिब्बे को ठंडा करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली गैस में पाया जाता है.

CFCs पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल की ओजोन परत (Ozone layer) को नुकसान पहुंचाती है, जिससे सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणें (Ultraviolet rays) पृथ्वी तक पहुंचने में सफल हो जाती हैं. पराबैंगनी किरणों में अत्यधिक वृद्धि से त्वचा कैंसर, नेत्र रोग या अन्य कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है.

कोयला, तेल और प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म ईंधन का अत्यधिक उपयोग वायु प्रदूषण को बढ़ावा देता है. जब किसी वाहन को चलाने के लिए पेट्रोल जलाया जाता है, तो वह कार्बन मोनोऑक्साइड छोड़ता है जो एक रंगहीन और गंधहीन गैस होती है. अधिक मात्रा में निकलने वाली कार्बन मोनोऑक्साइड हवा को जहरीला बना देती है.

इसके अलावा कुछ प्राकृतिक स्रोत भी हैं जिनके कारण वायु प्रदूषण फैलता है, जैसे ज्वालामुखी की राख, जंगल की आग जो हवा के साथ प्रदूषण फैलाती हैं, हालांकि ऐसी प्राकृतिक घटनाएं मानव द्वारा फैलाए गए प्रदूषण की तुलना में बेहद कम हैं.

वायु प्रदूषण के दुष्प्रभाव (Air pollution side effects in Hindi):

वायु प्रदूषण से होने वाले कुछ नुकसान या दुष्प्रभाव इस प्रकार हैं.

मनुष्यों पर प्रभाव

वायु प्रदूषण के कारण लोगों को निम्नलिखित स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं:

  • प्रदूषण के कारण हवा सांस लेने लायक नहीं रहती, जिससे अस्थमा, आंखों में जलन जैसी बीमारियां आम हो जाती हैं. मनुष्य में ही नहीं अन्य जीवों में भी अनेक प्रकार के रोग उत्पन्न हो जाते हैं.
  • वायु प्रदूषण से आंखों, नाक, गले और त्वचा में जलन हो सकती है. साथ ही सिर दर्द, चक्कर आना और जी मिचलाने जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं.
  • लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से हृदय रोग, फेफड़ों का कैंसर, अस्थमा जैसे श्वसन रोग आदि हो सकते हैं.
  • वायु प्रदूषण लोगों की नसों, मस्तिष्क, गुर्दे, यकृत और अन्य अंगों को भी दीर्घकालिक नुकसान पहुंचा सकता है.

पर्यावरणीय प्रभाव

  • बढ़ते ग्लोबल वार्मिंग (Global warming) जैसी वैश्विक समस्या के लिए वायु प्रदूषण मुख्य समस्याओं में से एक है. इसका मतलब है कि पूरी दुनिया में हवा और समुद्र का तापमान बढ़ रहा है. इस वृद्धि के पीछे का कारण ग्रीन हाउस गैसों में वृद्धि है. ग्रीनहाउस गैसें पृथ्वी की जलवायु में हीट एनर्जी को ट्रैप कर लेती हैं. इस गर्मी की वजह से ग्लेशियर और समुद्री बर्फ पिघल रही है. बढ़ते तापमान का वन्य जीवों और उनके आवास पर बुरा असर पड़ रहा है. बढ़ते तापमान के कारण कई प्रजातियां अपना स्थान बदल रही हैं.
  • प्रदूषण के कारण प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है. दुनिया भर में औसतन बारिश और बर्फबारी बढ़ रही है, जबकि कुछ क्षेत्रों में सूखे का सामना करना पड़ रहा है, जिससे फसल की विफलता, जंगल की आग और पीने योग्य पानी की कमी जैसी समस्याएं पैदा हो रही हैं. 
  • जब वायु प्रदूषक जैसे नाइट्रोजन ऑक्साइड और सल्फर ऑक्साइड नमी के साथ मिल जाते हैं, तो वे एसिड में बदल जाते हैं और अम्लीय वर्षा (Acid rain) के रूप में पृथ्वी पर गिरते हैं. अम्लीय वर्षा जंगलों में पेड़ों को नष्ट कर सकती है. यह झीलों, नालों और जलमार्गों को नष्ट कर सकता है. इतना ही नहीं अम्लीय वर्षा संगमरमर और अन्य पत्थरों को भी नष्ट करने में भी सक्षम होती है.
  • पेड़-पौधे अपने लिए आवश्यक पोषक तत्वों (भोजन) का उत्पादन करने के लिए सूर्य के प्रकाश की ऊर्जा पर निर्भर करते हैं. ऐसे में जब वायु प्रदूषण होता है तो पेड़-पौधों की पत्तियों के छिद्र बंद हो जाते हैं और उनकी सांस लेने की प्रक्रिया रुक जाती है. अब जबकि मानव श्वसन तंत्र में पेड़-पौधों का महत्वपूर्ण योगदान है, ऐसे में पेड़-पौधों पर पड़ने वाला प्रतिकूल प्रभाव मानव स्वास्थ्य के लिए भी खतरा साबित होता है.
  • प्रदूषण कोहरे का भी कारण बनता है, जो सड़क पर दुर्घटनाओं को बढ़ाता है. 
  • इससे हमारी धरती के सुरक्षा कवच ओजोन परत (Ozone layer) को भी नुकसान पहुंचता है. 
  • कुछ हानिकारक प्रजातियां जैसे मच्छर, कीड़े, फसल के कीट और जेलिफ़िश आदि वायु प्रदूषण के कारण फल-फूल रहे हैं जिससे जंगलों और फसलों को भारी नुकसान हो रहा है.

वायु प्रदूषण को रोकने के उपाय (Measures to prevent air pollution in Hindi):

वायु प्रदूषण को रोकने के मुख्य उपायों में सामाजिक जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण है. हमें वायु प्रदूषण के खतरों के प्रति लोगों में जागरूकता फैलानी होगी, साथ ही कारखानों से निकलने वाली गैसों के उचित निपटान पर भी ध्यान देना होगा.

इसके अलावा अगर हम सब मिलकर नीचे दिए गए उपायों के संबंध में कार्रवाई करें तो निश्चित रूप से हम इस प्रदूषण को नियंत्रित कर सकते हैं.

  • घर के अंदर खाना बनाते समय उत्पन्न होने वाले धुएं को बाहर निकालने के लिए चूल्हे पर बड़ी चिमनी का प्रयोग करें और कोशिश करें कि धूम्ररहित चूल्हे (Smokeless stove) का ही प्रयोग करें.
  • ग्रामीण क्षेत्रों में गोबर गैस प्लांट का उपयोग किया जाना चाहिए. यह धुआं रहित ईंधन (Smokeless fuel) प्रकार है.
  • सूर्य की ऊर्जा से चलने वाले सोलर कुकर भी पर्यावरण पूरक उपायों में बहुत उपयोगी हैं.
  • बड़े-बड़े कारखानों की चिमनियों में फिल्टर होने चाहिए ताकि विषैले पदार्थ बाहर की हवा में फैलने की बजाय भीतर ही एकत्रित हो सकें.
  • आवासीय क्षेत्रों और आरक्षित वनों के आसपास कारखानों को स्थापित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.
  • वाहनों में ऐसे उपकरण लगाए जाने चाहिए, जिससे वाहनों के धुएं में प्रदूषक तत्वों की मात्रा कम हो सके.
  • पेट्रोल और डीजल वाहनों के स्थान पर इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रयोग किया जाना चाहिए.
  • सीसा रहित पेट्रोल यानि Unleaded petrol और CNG का अधिक से अधिक प्रयोग करना चाहिए.
  • कूड़ा करकट का उचित निस्तारण करना चाहिए, उसे जलाना नहीं चाहिए. कूड़े-कचरे को खुले में फेंकने के बजाय कम्पोस्ट पिट में सड़ा देना चाहिए. इसका उपयोग भूमि भराव (Land filling) में भी किया जा सकता है.
  • हमें कार चलाने या बाइक चलाने के बजाय सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना चाहिए.
  • वातावरण में धूल न उड़े इसके लिए पक्की सड़कें बनानी चाहिए ताकि हवा स्वच्छ रह सके.
  • धूम्रपान जैसे सिगरेट, हुक्का आदि का सेवन नहीं करना चाहिए.
  • पर्यावरण को स्वच्छ रखने में पेड़ अहम भूमिका निभाते हैं इसलिए अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए.

जल प्रदूषण क्या है? Water pollution in Hindi

What is water pollution in hindi
What is water pollution in Hindi

जल पृथ्वी पर सभी जीवों के जीवन का आधार है. जब प्रदूषक जैसे जहरीले पदार्थ, अक्सर रासायनिक उत्पाद या सूक्ष्मजीव, शुद्ध पानी में मिल जाते हैं, तो ऐसा पानी पीने और नहाने के लिए उपयुक्त नहीं होता है. प्रदूषित पानी से कई तरह की बीमारियां होने की आशंका रहती है.

पानी को तब प्रदूषित माना जा सकता है जब इसकी गुणवत्ता या संरचना में प्राकृतिक रूप से या मानवीय गतिविधियों के परिणामस्वरूप बदलाव आया हो.

आम तौर पर हमारे घरों में नलों के माध्यम से उपलब्ध पीने का पानी सुरक्षित और कीटाणु रहित होता है क्योंकि इसे नगर निगम के अधिकारियों द्वारा फ़िल्टर किए जाने के बाद ही घरों में आपूर्ति के लिए भेजा जाता है.

इस पानी की खासियत यह होती है कि इसमें किसी तरह की गंध, स्वाद, कीटाणु और धूल नहीं होती है. इसलिए आप इस पानी का इस्तेमाल बेझिझक पीने के लिए कर सकते हैं.

जल प्रदूषण के स्रोत (Sources of water pollution in Hindi):

  • घर का कचरा – घरेलू कचरा विभिन्न प्रकार की घरेलू गतिविधियों के कारण उत्पन्न होता है. वही गंदा पानी जब नदियों और तालाबों के आसपास फैल जाता है या उनमें मिल जाता है तो नदियों का साफ पानी भी प्रदूषित हो जाता है.
  • घरेलू डिटर्जेंट – घरों में प्रयोग होने वाले साबुन, सर्फ, फिनायल आदि नदियों, नालों में बहकर जल को दूषित करते हैं. इससे तालाब में जैविक पदार्थ की मात्रा बढ़ जाती है और पानी कम हो जाता है. इस समस्या को यूट्रोफिकेशन (Eutrophication) के नाम से जाना जाता है.
  • औद्योगिक अजैवी कूड़ा – तरह-तरह की फैक्ट्रियों से निकलने वाला हानिकारक रसायन युक्त जल तालाबों, नदियों और समुद्रों में मिल जाता है तो इससे भी जल प्रदूषण होता है.
  • नगरों और उद्योगों से निकलने वाला कूड़ा-करकट – शहरों और उद्योगों से निकलने वाला कचरा पानी में मिलकर उसे जहरीला बना देता है. उद्योगों और लोगों द्वारा कचरा सीधे जलमार्गों में डाला जाता है, जिससे पानी गंदा और दूषित हो जाता है.
  • कृषि अपशिष्ट उत्पाद – आजकल कृषि में रासायनिक खादों और कीटनाशकों का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है, जिससे वर्ष के दौरान खेतों में बहने वाला कटाव का पानी साफ पानी में मिल जाता है. बाद में यही पानी नदियों और तालाबों में मिल जाता है, जिससे जल प्रदूषण होता है.
  • रसायनों, भारी धातुओं और पोषक तत्वों का पानी में रिसना – कारखानों, खेतों और शहरों से निकलने वाले रसायन, धातु और पोषक तत्व (फास्फोरस और नाइट्रोजन) सभी पानी के साथ खाड़ियों और मुहानों में बहते हैं और फिर समुद्र में मिल जाते हैं.
  • अधिक विषैले पदार्थों के साथ रेडियोधर्मी अपशिष्ट – यूरेनियम, थोरियम और रेडॉन जैसे रेडियोधर्मी अपशिष्ट जल प्रदूषण के प्रमुख कारणों में से हैं. ये अपशिष्ट खनन गतिविधियों, बिजली संयंत्रों आदि से उत्पन्न होते हैं.
  • जल को शुद्ध करने वाले रसायन का अधिक उपयोग – पानी को शुद्ध करने वाले रसायनों जैसे क्लोरीन, क्लोरीन डाइऑक्साइड आदि का अत्यधिक उपयोग भी पानी को दूषित करता है.
  • तेल का रिसाव – कई बार ऐसा होता है कि किसी तकनीकी कारण से या किसी दुर्घटना के कारण तेल के जहाजों से तेल का रिसाव हो जाता है, जिससे समुद्र का पानी दूषित हो जाता है, जो पानी में मौजूद समुद्री जीवों और पौधों के लिए हानिकारक होता है.
  • कीटनाशकों और उर्वरकों का उपयोग – कीटनाशक और उर्वरक, लैंडफिल और सेप्टिक सिस्टम से निकलने वाला कचरा जमीन में मौजूद पानी को प्रदूषित करता है. कीटनाशक और उर्वरक, लैंडफिल और सेप्टिक सिस्टम से निकलने वाला कचरा जमीन में मौजूद पानी को प्रदूषित करता है, जो इंसानों के इस्तेमाल के लिए सुरक्षित नहीं होता है. भूजल में मौजूद इन प्रदूषकों को अलग करना या हटाना मुश्किल या असंभव है. साथ ही, भूजल की सफाई एक बहुत महंगी प्रक्रिया है. एक बार जल प्रदूषित हो जाने पर यह कई दशकों या हजारों वर्षों तक उपयोग के योग्य नहीं रहता है. भूजल में मौजूद प्रदूषक पानी के साथ बहते हैं और धारा, नदी या समुद्र में भी पहुंच जाते हैं.

जल प्रदूषण के दुष्प्रभाव (Water pollution side effects in Hindi):

मानव जीवन पर प्रभाव:

  • दूषित पानी पीने से मानव स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है. यदि प्रदूषित जल का उपयोग किया जाता है तो जल प्रदूषण से प्रभावित होकर विभिन्न प्रकार के जल जनित रोग उत्पन्न हो जाते हैं. इसके साथ ही दूषित पानी पीने से डायरिया, हैजा और टाइफाइड जैसी बीमारियां हो सकती हैं. कभी-कभी महामारी फैल जाती है, जिसका मुख्य कारण जल प्रदूषण भी होता है.
  • रासायनिक प्रदूषकों से युक्त दूषित पानी में जब कपड़े धोये जाते हैं या स्नान किया जाता है तो इसके त्वचा के संपर्क में आने से कई प्रकार के चर्म रोग हो जाते हैं और त्वचा में जलन और खाज-खुजली भी शुरू हो जाती है.

पर्यावरण पर प्रभाव:

  • जीवन के लिए पानी पर निर्भर रहने वाले पौधे और जानवर प्रदूषित पानी से अधिक प्रभावित होते हैं. पानी में मौजूद हानिकारक रसायन और अन्य पदार्थ जीवित प्राणियों के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं जिससे उनकी मौत भी हो जाती हैं. इसके साथ ही दूषित जल का पौधों पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है.
  • यदि दूषित पानी का उपयोग सिंचाई के लिए किया जाता है, तो फसलों को नुकसान हो सकता है. प्रदूषित जल के कारण फसलें नष्ट हो जाती हैं या उपज में कमी हो जाती है. साथ ही प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने का खतरा भी बढ़ जाता है.

जल प्रदूषण को रोकने के उपाय (Measures to prevent water pollution in Hindi):

जल प्रदूषण के कुछ निवारक उपाय इस प्रकार हैं:

  • हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि गंदा पानी स्वच्छ जल स्रोत में न मिल जाए.
  • कारखानों से निकलने वाले प्रदूषित रसायनों और कचरे को नदियों और तालाबों में नहीं जाने देना चाहिए.
  • घरों से निकलने वाले कूड़ा-करकट और मल-मूत्र के निस्तारण की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए.
  • शौचालय के बजाय जलस्रोत के पास और खुले में शौच नहीं करना चाहिए.
  • नदी, तालाब आदि जल स्त्रोतों में नहाना, कपड़े धोना, वाहन तथा पशुओं को धोना नहीं चाहिए.
  • घर और कारखाने का कचरा समुद्र और नदियों में नहीं फेंकना चाहिए. उन्हें एक स्थान पर व्यवस्थित तरीके से एकत्र किया जाना चाहिए.
  • पानी को कीटाणु मुक्त बनाने के लिए उचित मात्रा में उचित रसायनों का प्रयोग करना चाहिए.
  • खेती में कम से कम रसायनों का प्रयोग करना चाहिए.
  • जहरीले रसायन जैसे ब्लीच, पेंट, पेंट थिनर, अमोनिया और कई अन्य रसायन जो पर्यावरण के लिए खतरा हैं, उनका उचित तरीके से निपटान किया जाना चाहिए.
  • हमें गैर विषैले क्लीनर और बायोडिग्रेडेबल क्लीनर या कीटनाशक खरीदना चाहिए; ये आम क्लीनर या कीटनाशकों की तुलना में थोड़े महंगे होते हैं लेकिन जल प्रदूषण को रोकने में सहायक होते हैं.
  • रेडियोधर्मी पदार्थों को खुले में छोड़ने की बजाय गहरे गड्ढों में डालना चाहिए.

मृदा प्रदूषण क्या है? Soil pollution in Hindi

What is soil pollution in hindi
What is soil pollution in Hindi

भूमि सभी प्राणियों को जीने का आधार प्रदान करती है लेकिन यह भी प्रदूषण से अछूती नहीं रही है. 

भूमि के भौतिक, रासायनिक या जैविक गुणों में कोई भी ऐसा अवांछित परिवर्तन, जो सीधे मनुष्य और अन्य जीवों को प्रभावित करता है या यदि पृथ्वी की गुणवत्ता या उपयोगिता नष्ट हो जाती है, तो इसे भूमि प्रदूषण (Soil pollution) कहा जाता है. यह मुख्य रूप से कृषि में अत्यधिक कीटनाशकों व उर्दरकों के उपयोग के कारण होता है.

भूमि प्रदूषण के स्रोत:

  • घरेलू कूड़ा-करकट – घरों से निकलने वाला कूड़ा करकट या बेकार सामग्री भूमि प्रदूषण का मुख्य कारण है. उदाहरण के लिए, झाडू या सफाई के दौरान घरों से निकलने वाली धूल, कांच के टुकड़े, कांच की बोतल या शीशी, पॉलिथीन बैग, प्लास्टिक के टुकड़े या डिब्बे, कबाड़, अधजली लकड़ी, राख और कोयला सभी भूमि को प्रदूषित करते हैं. रसोई से निकलने वाली दाल, छिलके, सब्जी आदि का कचरा भी भूमि को प्रदूषित करता है. घरेलू कचरे में पॉलीथीन भूमि प्रदूषण का सबसे बड़ा और मुख्य कारण है, यह मिट्टी में दब जाने के बाद भी वर्षों तक नष्ट नहीं होता है. इसे जलाने पर निकलने वाली गैस भी जहरीली होती है जो पर्यावरण को प्रदूषित करती है.
  • उद्योगों से निकलने वाले अपशिष्ट – फैक्ट्रियों का कूड़ा-कचरा खुले में इधर-उधर फेंक दिया जाता है. इन अपशिष्ट पदार्थों में कुछ विषैले और निष्क्रिय, कुछ दुर्गन्ध वाले, ज्वलनशील और जैव अपघटक शामिल होते हैं. जिससे वहां की मिट्टी प्रदूषित हो जाती है और जमीन बंजर हो जाती है.
  • कृषि अपशिष्ट पदार्थ – फसलों की कटाई के बाद छोड़े गए कृषि अपशिष्ट जैसे पत्ते, लकड़ी, डंठल, पुआल, बीज आदि भूमि प्रदूषण का कारण बनते हैं. बारिश के बाद जैसे ही खेतों में पानी जमा हो जाता है, ये अपशिष्ट पदार्थ पानी के साथ सड़ने लगते हैं. इसके अलावा कृषि में इस्तेमाल होने वाले कीटनाशक और फफूंदनाशी भी भूमि को प्रदूषित करते हैं.
  • नगरपालिका से निकले अपशिष्ट – नगर निगम का कचरा जैसे अस्पतालों का कचरा, सब्जी मंडियों से सड़ी सब्जियां, घरों का कचरा, सड़े हुए फल, मल-मूत्र, मत्स्य पालन, मुर्गी पालन और सूअर पालन से निकलने वाला कचरा, औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाला कचरा और नालियों और नालियों से निकलने वाला कचरा जमीन को प्रदूषित करता है. इसके अलावा पशुशालाओं से निकलने वाला कचरा और गाय का गोबर भी भूमि प्रदूषण का कारण बनता है.
  • मानव गंदगी – खुले में शौच और पेशाब करने से इस मल-मूत्र में मौजूद कीटाणु मिट्टी को दूषित कर देते हैं. वर्षा ऋतु में यही दूषित मिट्टी स्वच्छ जलस्रोतों में मिल जाती है जिससे स्वच्छ जल भी दूषित हो जाता है.

भूमि प्रदूषण के दुष्प्रभाव:

मानव स्वास्थ्य पर प्रभाव:

  • कूड़ा-करकट और गंदगी फैलने से इनमें कीड़े, मच्छर और मक्खियां पनपने लगती हैं, जिससे हैजा, टाइफाइड, पेचिश, पीलिया, लीवर और किडनी से संबंधित रोग आदि कई तरह के रोग हो जाते हैं. साथ ही इनमें सांप और बिच्छू जैसे जहरीले जीव भी पैदा हो जाते हैं जो इंसानों को नुकसान पहुंचा सकते हैं.

पर्यावरण पर प्रभाव:

  • सामान्यतः ठोस अपशिष्ट पदार्थ मिट्टी के नीचे दब जाते हैं, जिससे मिट्टी की उत्पादक क्षमता पर बुरा प्रभाव पड़ता है. इसके साथ ही मिट्टी में मौजूद गैर-नवीकरणीय धातु जैसे तांबा, जस्ता, सीसा आदि को भी नुकसान पहुंचता है. कुछ स्थानों पर लोग सीवेज के पानी से खेतों की सिंचाई करते हैं, जिससे मिट्टी के छिद्रों की संख्या कम हो जाती है और कुछ समय बाद भूमि की प्राकृतिक सीवेज उपचार क्षमता नष्ट हो जाती है. ऐसी स्थिति में भूमि रोगी भूमि कहलाती है.
  • जब मिट्टी में प्रदूषण या प्रदूषित पदार्थों की मात्रा बढ़ जाती है, तो वे जल स्रोतों तक पहुंचने के बाद पानी में लवणों और अन्य हानिकारक तत्वों की मात्रा में वृद्धि करते हैं और स्रोतों का पानी पीने के लिए अनुपयुक्त हो जाता है.

मृदा प्रदूषण को कैसे रोका जा सकता है?

भूमि प्रदूषण को रोकने के उपाय निम्नलिखित हैं:

  • मृदा प्रदूषण को रोकने का सबसे अच्छा तरीका रासायनिक उर्वरकों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाना है. साथ ही कीटनाशक दवाओं का छिड़काव भी कम करना चाहिए.
  • कचरे का उचित निस्तारण करना: घरों और होटलों में ढके हुए कूड़ेदानों का उपयोग करना चाहिए ताकि उस पर मक्खियां, मच्छर और तिलचट्टे न पनप सकें. साथ ही घर में कूड़ा करकट के निस्तारण की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए.
  • प्रदूषण के नुकसान के बारे में सामाजिक जागरूकता और जन जागरूकता पैदा करके मिट्टी के प्रदूषण को रोकने के प्रयास भी किए जा सकते हैं.
  • अपशिष्ट पदार्थों के निपटान को नगरपालिका और नगर निकायों द्वारा प्राथमिकता दी जानी चाहिए.

ध्वनि प्रदूषण क्या है? Noise pollution in Hindi

What is noise pollution in hindi
What is noise pollution in Hindi

ध्वनि प्रदूषण तब होता है जब ध्वनि शोर में बदल जाती है. ध्वनि की एक निश्चित तीव्रता होती है जिसे कानों द्वारा आसानी से सुना जा सकता है. इस तीव्रता से अधिक की ध्वनि सुनने योग्य नहीं होती है और इसे ही ध्वनि प्रदूषण (Noise pollution) कहते हैं.

तेज ध्वनि वाले उपकरणों के प्रयोग से ध्वनि प्रदूषण फैलता है. मशीनों और लाउडस्पीकरों का शोर और वाहनों के आवागमन की आवाज काफी हद तक परेशान करती है और ध्वनि प्रदूषण का कारण बनती है.

ध्वनि प्रदूषण के स्रोत – Sources of noise pollution in Hindi:

किसी भी प्रकार का अनावश्यक शोर ध्वनि प्रदूषण का कारण बनता है. जैसे-जैसे मानव सभ्यता विकसित हो रही है और आधुनिक उपकरणों से लैस हो रही है, उसी अनुपात में ध्वनि प्रदूषण की समस्या भी विकराल और गंभीर रूप धारण करती जा रही है.

ध्वनि प्रदूषण कारखानों की मशीनों द्वारा उत्पन्न तेज आवाज, वाहनों के हॉर्न की आवाज, लाउडस्पीकर की आवाज, रेडियो और टेलीविजन की आवाज आदि के कारण होता है. यह प्रदूषण मानव जीवन को तनावपूर्ण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.

ध्वनि प्रदूषण के प्रभाव:

  • इस तरह के प्रदूषण से कानों की सुनने की क्षमता प्रभावित होती है. 
  • लंबे समय तक तेज आवाज के संपर्क में रहने से बहरेपन की सम्भावना भी बढ़ जाती है.
  • लगातार तेज आवाजें सुनने से हमारे कानों की नसों पर दबाव पड़ता है जिससे सिरदर्द भी हो सकता है.
  • मनुष्य की प्रवृति में मानसिक तनाव और चिड़चिड़ापन बढ़ जाता है.
  • जोर का शोर न केवल हमारी सुनने की शक्ति को प्रभावित करता है, बल्कि यह रक्तचाप, हृदय रोग, सिरदर्द, अनिद्रा और मानसिक रोगों का भी कारण बनता है.

ध्वनि प्रदूषण की रोकथाम कैसे करें:

हम ध्वनि प्रदूषण से पूरी तरह छुटकारा तो नहीं पा सकते, लेकिन उसकी मात्रा को जरूर कम कर सकते हैं. इसके लिए कुछ कारगर सुझाव इस प्रकार हैं.

  • ध्वनि प्रदूषण को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है ध्वनि को कम करना. यदि ध्वनि की तीव्रता को नियंत्रण में रखा जाए तो शोर को कम किया जा सकता है.
  • वाहनों में तेज आवाज वाले हार्न पर प्रतिबंध लगाकर भी ध्वनि प्रदूषण को रोका जा सकता है. वाहन का हार्न तभी बजाएं जब अत्यंत आवश्यक हो.
  • बिजली के उपकरण जैसे रेडियो, टेलीविजन और लाउडस्पीकर को कम आवाज में चलाना चाहिए.
  • मशीनों से होने वाले ध्वनि प्रदूषण पर भी अंकुश लगाया जाना चाहिए.

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