मकर संक्रांति पर निबंध – Makar Sankranti Essay In Hindi

मकर संक्रांति पर निबंध - Makar Sankranti Essay In Hindi

Essay On Makar Sankranti In Hindi – जनवरी के महीने में मनाई जाने वाली मकर संक्रांति हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है. यह पर्व सूर्य के उत्तरायण (Uttarayan) होने पर मनाया जाता है, अर्थात इस दिन सूर्य देव (Sun) दक्षिण गोलार्ध से उत्तरी गोलार्ध की ओर गमन करने लगते हैं.

यह देवताओं के दिन की शुरुआत का भी प्रतीक है, माना जाता है कि इसी दिन से यानी 14 जनवरी से धरती पर अच्छे दिनों की शुरुआत हो जाती है और शुभ कार्य किए जा सकते हैं.

इस पर्व की खास बात यह है कि यह अन्य त्योहारों की तरह अलग-अलग तारीखों में नहीं मनाया जाता, बल्कि हर साल 14 जनवरी को ही मनाया जाता है, जब सूर्य उत्तरायण के बाद मकर रेखा (Tropic of Capricorn) से गुजरता है.

मकर संक्रांति पर निबंध (Essay On Makar Sankranti In Hindi)

मकर संक्रांति पर निबंध (Makar Sankranti Essay in Hindi) पढ़ते समय आपको पता चलेगा कि मकर संक्रांति कब और क्यों मनाई जाती है, मकर संक्रांति क्या है?, मकर संक्रांति कैसे मनाई जाती है? मकर संक्रांति की क्या विशेषता है? और भी बहुत कुछ जानकारी तो इस लेख  को अंत तक ध्यान से पढ़े.

मकर संक्रांति का क्या अर्थ है? Makar Sankranti meaning in Hindi

मकर संक्रांति मकर (Makar) और संक्रांति (Sankranti) इन दो शब्दों से मिलकर बना है- मकर का अर्थ है मकर राशि (Capricorn) और संक्रांति का अर्थ है परिवर्तन (Change). 

जब सूर्य देव मकर राशि में भ्रमण (परिवर्तन) करते हैं तो इसे मकर संक्रांति कहते हैं. 

मकर संक्रांति (उत्तरायण) क्या है? Makar Sankranti Par Nibandh

हिंदू पंचांग (Hindu calendar) के अनुसार मकर संक्रांति का यह पर्व तब मनाया जाता है जब पौष मास में सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर मकर रेखा में प्रवेश करता है.

देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे अलग-अलग नामों से मनाया जाता है, लेकिन यह दिन पूरी तरह से सूर्य देव को समर्पित है, इसीलिए हर जगह सूर्य की पूजा की जाती है.

देश के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नाम से मनाये जाने वाले इस पर्व में अच्छी फसल की पैदावार के लिए भगवान सूर्य की पूजा की जाती है और उन्हें धन्यवाद दिया जाता है.

मकर संक्रांति पर्व कब मनाया जाता है? About Makar Sankranti In Hindi

यूं तो यह पर्व हर साल 14 जनवरी को मनाया जाता है लेकिन सौर चक्र के आधार पर कभी-कभी इसे 15 जनवरी को भी मनाया जा सकता है. 

मान्यता है कि इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनिदेव (Shani Dev) से मिलने जाते हैं और शनि देव मकर राशि (Capricorn) के स्वामी भी हैं, इसलिए इस दिन को मकर संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है.

अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार माना जाता है कि साल के हिंदू त्योहारों की शुरुआत इसी दिन से होती है.

मकर संक्रांति का पर्व कैसे मनाया जाता है? Makar Sankranti Festival in Hindi

इस दिन परिवार के सभी सदस्य सुबह जल्दी उठकर तिल का उबटन कर मंगल स्नान करते हैं. इसके अलावा तिल और गुड़ से बने लड्डू और अन्य पकवानों का भगवान को भोग चढ़ाया जाता है.

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, यह भगवान सूर्य की उपासना का दिन है, इस दिन लोग पवित्र नदियों में मंगल स्नान करते हैं और सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं और दानधर्म भी करते.

इस दिन विवाहित स्त्रियां सुहाग की सामग्री का आदान-प्रदान करती हैं, ऐसा माना जाता है कि इससे उनके पति की उम्र लंबी होती है.

इस दिन पतंगबाजी (Kite flying) का भी विशेष महत्व होता है. यह एक ऐसा दिन है जब आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भरा होता है. इस दिन कई जगहों पर पतंगबाजी के बड़े आयोजन भी किए जाते हैं. 

बच्चों में पतंगबाजी को लेकर काफी उत्साह रहता है, जिसके लिए 10-15 दिन पहले से ही बच्चों द्वारा तैयारी शुरू कर दी जाती है. पतंगबाजी को बच्चों के साथ-साथ बड़े भी हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं.

मकर संक्रांति का पर्व अलग-अलग नामों और रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है:

महाराष्ट्र और उत्तर भारत में मकर संक्रांति (Makar Sankranti) के नाम से मनाया जाने वाला यह त्योहार भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है. 

आंध्र प्रदेश, केरल और कर्नाटक में इसे संक्रांति (Sankranti) कहा जाता है और तमिलनाडु में इसे पोंगल उत्सव (Pongal festival) के रूप में मनाया जाता है. जबकि गुजरात में उत्तरायण (Uttarayan) और असम में बिहू (Bihu) के रूप में इस त्योहार को उत्साह के साथ मनाया जाता है.

पंजाब और हरियाणा में नई फसल का स्वागत किया जाता है और मकर संक्रांति के एक दिन पहले लोहड़ी का त्योहार (Lohri festival) मनाया जाता है, जो एक मौसमी त्योहार है. 

मकर संक्रांति की विशेषता:

इस पर्व का नाम और इसे मनाने का तरीका हर प्रांत में अलग-अलग है. अलग-अलग मान्यताओं के अनुसार इस त्योहार के व्यंजन भी अलग-अलग होते हैं, लेकिन दाल और चावल की खिचड़ी इस त्योहार की मुख्य पहचान बन गई है. खासतौर पर गुड़ और घी के साथ खिचड़ी खाने का महत्व है. इसके अलावा मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ का भी बहुत महत्व है.

धर्म-ज्योतिष की दृष्टि से मकर संक्रांति:

शास्त्रों के अनुसार सूर्य की छह महीने की दक्षिणायन स्थिति को देवताओं की रात्रि और उत्तरायण के छह महीनों को दिन कहा जाता है.

दक्षिणायन को नकारात्मकता और अंधकार का प्रतीक माना जाता है और उत्तरायण को सकारात्मकता और प्रकाश का प्रतीक माना जाता है.

ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि से इस दिन सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है और सूर्य के उत्तरायण की गति शुरू होती है. मकर संक्रांति का पर्व सूर्य के उत्तरायण प्रवेश के साथ स्वागत पर्व के रूप में मनाया जाता है.

एक वर्ष में मेष, वृष, मकर, कुम्भ, धनु आदि बारह राशियों में सूर्य के बारह गोचर होते हैं और जब सूर्य धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करता है, तब मकर संक्रांति होती है.

यह भी माना जाता है कि मकर संक्रांति के दिन देवता यज्ञ में चढ़ाए गए द्रव्य को ग्रहण करने के लिए धरती पर अवतार लेते हैं और इसी रास्ते से पवित्र आत्माएं शरीर छोड़कर स्वर्ग आदि लोकों में प्रवेश करती हैं.

मकर संक्रांति पर दान का महत्व:

मान्यता है कि दान करने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है. माना जाता है कि मकर संक्रांति के दिन चावल, गेहूं, मिठाई का दान करने से व्यक्ति के जीवन में समृद्धि आती है और उसके सभी विघ्न दूर होते हैं.

हमारी सनातन संस्कृति में इस दिन दानपुण्य करने की पुरानी प्रथा है. तिल-गुड़ से बनी मिठाई, चावल-दाल, चिवड़ा, वस्त्र, नगद आदि निर्धनों, ब्राह्मणों आदि को अपनी आर्थिक शक्ति के अनुसार दान किया जाता है.

विभिन्न मान्यताओं के अनुसार पापों से मुक्ति पाने और भगवान सूर्य की पूजा कर दानधर्म करने के लिए कई स्थानों पर पवित्र नदियों में स्नान करने की प्रथा है. 

ऐसी मान्यता है कि मकर संक्रांति के पर्व पर किया गया दान-पुण्य अन्य दिनों की अपेक्षा सौ गुना अधिक पुण्य अर्जित करता है.

मकर संक्रांति पर विशेष खान-पान का आयोजन किया जाता है:

मकर संक्रांति के मौके पर हर घर में आम दिनों से हटकर कुछ अलग तरह के खाद्य पदार्थ बनाये जाते है. इन दिनों मूंगफली और गुड़ की चिक्की, तिलकुट्टा और तिलगुड़ से बने व्यंजन बहुत पसंद किये जाते हैं.

मकर संक्रांति के पर्व पर सूर्य को तिल, गुड़, ज्वार, बाजरे से बने व्यंजन का भोग लगाया जाता है और फिर लोग प्रसाद के रूप में इनका सेवन करते हैं.

महाराष्ट्र में गन्ने की पहली फसल आने के कारण इस दिन किसानों के साथ खुशियां बांटने के लिए हर घर में तिल-गुड़ बनाकर खाया जाता है.

राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, दिल्ली समेत कई राज्यों में दाल चावल की खिचड़ी, तिल गुड़ की गजक, रेवड़ी आदि खाने का रिवाज है.

नई फसल के चावल में तरह-तरह की सब्जियां मिलाकर खिचड़ी बनाई जाती है और इसे देसी घी या दही के साथ परोसा जाता है.

पश्चिम बंगाल में चावल के आटे और खजूर, गुड़ से बनी पीठे, पुली और पातिशप्ता मिठाई खाई और खिलाई जाती है. कई राज्यों में इस मौके पर घेवर और फीनी भी खाई जाती है और बहन-बेटियों के ससुराल में भी भेजी जाती है.

सूर्य देव से आशीर्वाद प्राप्त करने का दिन है मकर संक्रांति:

मकर संक्रांति का पर्व फसलों की अच्छी उपज के लिए ईश्वर को धन्यवाद देने और किसानों पर उनका आशीर्वाद हमेशा बना रहे, इसके लिए भी मनाया जाता है.

इस दिन खेती में काम आने वाले औजार जैसे हल, कुदाल और पशु बैल आदि की पूजा की जाती है और सूर्य देव की पूजा कर प्रार्थना की जाती है कि भगवान हमेशा किसानों पर कृपा करें.

निष्कर्ष:

मकर संक्रांति हिंदुओं का एक महत्वपूर्ण त्योहार है जिसका आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व है. यह दिन मुख्य रूप से सूर्य देव को समर्पित है.

मकर संक्रांति के दिन से रातें छोटी और दिन बड़े होने लगते हैं जो आध्यात्मिक प्रकाश की वृद्धि और भौतिकवादी अंधकार के कम होने का द्योतक है.

मकर संक्रांति का पर्व बुराई का अंत कर अच्छाई की शुरुआत करना है. मकर संक्रांति का मुख्य उद्देश्य लोगों में भेदभाव की भावना को खत्म कर मेल-मिलाप को बढ़ाना है.

मकर संक्रांति पर 10 पंक्तियां हिंदी में (10 Lines on Makar Sankranti in Hindi)

  1. मकर संक्रांति हिंदुओं का एक महत्वपूर्ण त्योहार है जिसका आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व है.
  2. इस दिन सूर्य देव दक्षिण गोलार्ध से उत्तरी गोलार्ध की ओर गमन करने लगते हैं.
  3. यूं तो यह पर्व हर साल 14 जनवरी को मनाया जाता है लेकिन सौर चक्र के आधार पर कभी-कभी इसे 15 जनवरी को भी मनाया जा सकता है.
  4. अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार माना जाता है कि साल के हिंदू त्योहारों की शुरुआत इसी दिन से होती है.
  5. इस दिन परिवार के सभी सदस्य सुबह जल्दी उठकर तिल का उबटन कर मंगल स्नान करते हैं.
  6. इस दिन पतंगबाजी का भी विशेष महत्व होता है और बच्चों के साथ-साथ बड़े भी हर्षोल्लास के साथ पतंगबाजी मनाते हैं.
  7. मकर संक्रांति का पर्व देश के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग नामों और रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है.
  8. मकर संक्रांति पर तिल और गुड़ का बहुत महत्व है और चावल की खिचड़ी भी इस त्योहार की मुख्य पहचान बन गई है.
  9. मान्यता है कि मकर संक्रांति के दिन दान करने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है.
  10. मकर संक्रांति का मुख्य उद्देश्य लोगों में भेदभाव की भावना को खत्म कर मेल-मिलाप को बढ़ाना है.
मकर संक्रांति पर निबंध - Makar Sankranti Essay In Hindi
Essay On Makar Sankranti In Hindi

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