कैलेंडर के महीनों को उनके नाम कैसे मिले, जानिए हिंदी में? How did the calendar months get their names, know in Hindi?

How did the calendar months get their names, know in Hindi? कैलेंडर के महीनों को उनके नाम कैसे मिले, जानिए हिंदी में?

कैलेंडर के महीनों को उनके नाम कैसे मिले? जवाब है, प्राचीन रोम! 

यह बहुत सरल है कि कैलेंडर के लगभग सभी साप्ताहिक दिनों और महीनों के नाम, वास्तव में, रोमन काल, रोमन साम्राज्य, सम्राटों, और इसी तरह, रोमन पौराणिक कथाओं, देवी-देवताओं, साथ ही साथ कुछ लैटिन शब्दों से आते हैं. तो, आइए इन सभी पर एक नजर डालते हैं.

लेकिन इसके बीच की बारीकियों को समझना थोड़ा मुश्किल है क्योंकि यह जरा जटिल प्रक्रिया हैं. इसे पूरा समझने के लिए, हमें ‘मार्च’ (March) महीने से शुरुआत करनी होगी. क्योंकि ‘मार्च’ लंबे समय तक रोमन साम्राज्य कैलेंडर का पहला महीना हुआ करता था. और साल की शुरुआत ‘मार्च’ से होती थी, और फिर संभवतः ‘जनवरी’ (January), ‘फरवरी’ (February) महीने अंत में आते थे. 

लैटिन भाषा में, इसे ‘मार्टियस’ (Martius) कहा जाता था और इसे युद्ध और कृषि के देवता ‘मार्स’ (Mars) के लिए नामांकित किया गया था! तो इसके पीछे की प्रेरणा शायद यह हो सकती है की खेती के मौसम की शुरुआत के साथ कुछ बेहतर करना हो सकती है.

प्राचीन रोमन कैलेंडर का दूसरा महीना ‘अप्रैलिस’ (Aprilis) था. यह नाम लैटिन शब्द ‘अपरिरे’ (Aperire) के लिए हो सकता है जिसका अर्थ है ‘खोलना’, ‘कलियों को खोलना’ या शायद ‘एफ्रोडाइट’ (Aphrodite), लेकिन हम वास्तव में इसके बारे में नहीं जानते हैं.

‘माईस’ (Maius) प्राचीन रोमन कैलेंडर का तीसरा महीना था, जिसे ‘माया’ (Maia) के लिए नामित किया गया था, जो कि प्रजनन क्षमता से जुड़ी एक धरती देवी थी, जिसकी प्रतिष्ठा एक अच्छी मां के रूप में थी. वह ‘बुध’ (Mercury) की मां थी.

चौथे महीने का नाम देवी ‘जूनो’ (Juno) के लिए रखा गया था, जो विवाह और प्रसव की देवी है. यह हमेशा शादियों के लिए एक अच्छा महीना रहा है.

उसके बाद आया – ‘क्विंटिलिस’ (Quintilis). पांचवे वें महीने को ‘क्विंटिलिस’ (Quintilis) कहा जाता था, जो की ‘क्विंटस’ (Quintus) शब्द से आया, और जिसका अर्थ होता है ‘पांचवा’ (Fifth) या ‘5’ . 

फिर – ‘सेक्स्टिलिस’ (Sextilis), ‘सेक्स्टस’ (Sextus) शब्द से, और जिसका अर्थ होता है ‘छठा’ (Sixth) या ‘6’. 

और फिर 7 वा महीना, या ‘सप्टेंबर’ (September), जो की ‘सेप्टम’ (Septem) या 7 को दर्शाता है. 

अब आप बाकी बचे हुए महीनों के बारे में समझ गए होंगे.

‘ऑक्टोबर’ (October), 8 वा महीना, और ‘नोव्हेंबर’ (November), 9 वा महीना.

और अंत में दसवां महीना, ‘डेसम’ (Decem), ‘डिसेंबर’ (December) से.

उसके बाद? बस सर्दियों के दिनों का मौसम होता था. और ‘मार्च’ मास वापस आने तक बस इंतजार करना होता था, जो वसंत विषुव (Equinox – विषुव, ऐसा समय-बिंदु होता है, जिसमें दिवस और रात्रि लगभग बराबर होते हैं) द्वारा निर्धारित किया गया था. 

आखिरकार, इस अवधि के लिए कैलेंडर में दो और महीने जोड़े गए.

दो-मुखों वाले भगवान ‘जानुस’ (Janus) के नाम पर, ‘जनुअरीस’ (Januarius) जो की ‘द्वार के ईश्वर’ कहलाते है और उनके दोनों चेहरे आमतौर पर बाएं और दाएं होते हैं. भगवान, जो दोनों दिशाओं को देखते हैं, अतीत की ओर और भविष्य की ओर आगे, और दरवाजों के माध्यम से भी, बेशक, आप या तो दरवाजे से अंदर या दरवाजे से बाहर जाते हैं, इसलिए यह दो दिशाओं के बारे में प्रतिनिधित्व करते है, जो की अवस्थांतर का स्थान है. तो ‘जनवरी’ (January) महीने का नाम ‘जानुस’ (Janus) से आया है.

और फिर आता है ‘फरवरी’ (February), यह शायद इतना स्पष्ट नहीं है कि यह नाम कहां से आता है, लेकिन दार्शनिकों का मानना है कि यह लैटिन शब्द ‘फेयुरेरियस’ (Februarius) से आता है, जो की ‘फिर्रुआ’ (Februa) के नाम पर रखा गया है. यह वसंत के लिए तैयारी के दौरान उस समय आयोजित ‘शुद्धि उत्सव’ का नाम है, क्योंकि रोमन साम्राज्य में वर्ष के उस समय ‘क्षमा’ का एक त्योहार मनाया जाता था जब लोगों को उनके सभी गलतियों के लिए माफ कर दिया जाता था. तो यह एक तरह का शुद्धिकरण काल हुआ करता था.

रोमन कैलेंडर एक असंगत अव्यवस्था बन गया था जिसमें अतिरिक्त दिन यहां-वहां और कभी-कभी पूरे अतिरिक्त महीनों में अटक जाते थे. इससे चंद्रमा और सूर्य के कालचक्र प्रणाली को समझना कठिन हो गया था. 

लेकिन 46 ईसा पूर्व में ‘जूलियस सीज़र’ (Julius Caesar) ने 365 दिन की एक बहुत सुसंगत वर्ष के साथ एक नई प्रणाली शुरू की, जिसमे हर चार साल में एक अतिरिक्त दिन ‘फरवरी’ (February) में जोड़ा गया.

यह तब हुआ जब 5 वें महीने ‘क्विंटिलिस’ (Quintilis) का नाम बदलकर ‘जूलियस’ (Julius) रखा गया, याने की ‘जुलाई’ (July), और यह सीज़र (Caesar) के जन्मदिन का महीना था.

‘सीज़र’ (Caesar) के बाद बने रोम के सम्राट ‘ऑगस्टस’ (Augustus), ने सोचा की महीने का नामकरण अच्छा विकल्प है, और इसलिए ‘सेक्स्टिलिस’ (Sextilis) यानी छठा महीना बन गया ‘ऑगस्टस’ (Augustus), जिसे ‘अगस्त’ (August) कहा जाता है. 

महीने के नामकरण की परंपरा वही समाप्त हो गयी, इसलिए ‘सितंबर’ (September) से, हमें पुरानी संख्या प्रणाली के साथ छोड़ दिया गया था.

कैलेंडर की क्रम प्रणाली 16 वीं शताब्दी में ‘पोप ग्रेगोरी’ (Pope Gregory) द्वारा बदल दी गयी थी, ‘जनवरी’ को आधिकारिक रूप से साल का पहला महीना बना दिया गया.

लेकिन, क्योंकि साल की शुरुआत ‘मार्च’ (March) की बजाए ‘जनवरी’ (January) की गई थी, इसलिए संख्या क्रम का तालमेल बिगड़ गया. 7 वां महीना – 9 वां महीना बन गया, और 10 वां महीना – 12 वां महीना बन गया.

हालांकि, सभी महीनों को नामों के साथ उपयोग में लाया जाता था, और इस के पूरे दिनों की गिनती करना काफी कठिन बात थी, इसलिए नामकरण प्रथा भी बंद हो गई.

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