शहद: एकमात्र ऐसा खाद्य है जो हजारों साल तक खराब नहीं होता है (Honey: The only food that does not spoil for thousands of years)

Honey is the only food that does not spoil for thousands of years

शहद एक अलौकिक खाद्य है, जो मधुमक्खियों द्वारा बनाया जाता है. इसके स्वादिष्ट और सुमधुर स्वाद के अलावा, यह एकमात्र खाद्य जो कभी खराब नहीं होता है. लेकिन, शहद खराब न होने और हजारों साल बाद भी खाने योग्य बने रहने के पीछे का रहस्य क्या है?

शहद में बहुत सारे अविश्वसनीय गुण पाए जाते हैं. लंबे समय से इसका उपयोग औषधि के तरह होता आया है, विशेष रूप से खुले घावों के उपचार के रूप में इसे आज भी उपयोग किया जाता है. ग्रीक इतिहासकार हेरोडोटस के अनुसार बेबीलोनियों राज्य में मृतकों को शहद से भरे ताबूत में दफन कर दिया जाता था, और सिकंदर महान को भी शहद से भरे सोने के ताबूत में कही दफन किया होगा. 

पुरातत्वविदों को जॉर्जिया में एक शाही मकबरे में शहद से भरा चीनी-मिट्टी का घडा मिला है, जिसे अब तक का सबसे पुराना पाया गया शहद माना जाता है, और यह लगभग 5,500 साल पुराना होने की आशंका है. शहद कभी खराब नहीं होता चाहे कितना भी पुराना क्यों न हो, तो अगर आपको भी 5,500 साल पुराना शहद मिल जाये तो आप इसे बेहिचक सेवन कर सकते है. 

शहद के रासायनिक गुण

शहद, सही मायने में एक प्राकृतिक शर्करा/चीनी है. शहद फ्रुक्टोज (40%), ग्लूकोज (30%), पानी और खनिजों जैसे लोहा, कैल्शियम, पोटेशियम और मैग्नीशियम से बनता है. फ्रुक्टोज के उच्च स्तर के कारण, शहद कृत्रिम चीनी की तुलना में मीठा होता है. शहद एक उच्च कार्बोहाइड्रेट युक्त खाद्य है. हालांकि शहद नियमित, दानेदार, सफेद चीनी के समान नहीं है, फिर भी यह एक शर्करा/चीनी ही है. शहद के प्राकृतिक स्थिति में ज्यादा पानी समाविष्ट नहीं होता है, परिणामस्वरूप कम नमी वाले वातावरण में बहुत कम बैक्टीरिया और सूक्ष्मजीव जिंदा रह सकते हैं.

शहद के प्राकृतिक रूप में बहुत कम नमी होती है. ऐसे वातावरण में बहुत कम बैक्टीरिया या सूक्ष्मजीव जीवित रह सकते हैं, और वे जल्द ही खत्म हो जाते है.  बैक्टीरिया या सूक्ष्मजीव शहद में लंबे समय तक जीवित नहीं रह सकते हैं, इसका मतलब है कि उन्हें इसे दूषित या खराब करने का समय नहीं मिलता है.

शहद में नमी बनाये रखने के कुछ अन्य महत्वपूर्ण घटक भी शामिल हैं:

मधुमक्खियां
सबसे पहले, मधुमक्खियां फूलों से पराग कणों को इकट्ठा करते समय अपने पंखों को फडफडाकर पराग कणों में से नमी सोख लेते हैं, और फिर बडी कुशलतासे  पराग कणों को अपने छत्ते में जमा करती है. मधुमक्खियों के पेट में एंजाइम ग्लूकोज ऑक्सीडेज होता है, जो पराग कणों को छत्ते में जमा करते समय पराग कणों में मिल जाता है, और यह शहद को लंबे समय तक खाने योग्य बनाने में योगदान देता है. एंजाइम और पराग कण आपस में मिक्स होकर ग्लूकोनिक एसिड और हाइड्रोजन पेरोक्साइड बनाते है. हाइड्रोजन पेरोक्साइड शहद में बैक्टीरिया या सूक्ष्मजीव के बढने से अवरोध करता है. 

संचयन
यह एक आसान लेकिन महत्वपूर्ण कार्य है. शहद हाइड्रोस्कोपिक होता है, इसका मतलब है कि इसकी प्राकृतिक अवस्था में बहुत कम पानी होता है, लेकिन हवा के संपर्क में आने पर इसमें नमि बढ सकती है. अगर ऐसा होता है, तो शहद खराब हो सकता है. इसलिए सुनिश्चित करे की शहद का बर्तन अच्छी तरह से हवाबंद है और इसे हमेशा सूखी जगह पर संग्रहीत करे. 

स्फटिकरूप से घना बनना
लंबे समय बाद अक्सर शहद स्फटिकरूप से घना बन जाता है, इसका ये मतलब नहीं की शहद खराब हो गया. अलग-अलग प्रकार के शहद में स्फटिक बनने का समय और मात्रा कम ज्यादा हो सकती है. यदि ऐसा होता है, तो बस जार से ढक्कन हटा दें, और अब इस जार को पानी के बर्तन में रखें, और इसे कम आंच पर गर्म करें जब तक कि शहद अपनी मूल रूप में वापस न आ जाए.

बच्चों (शिशु) के लिए चेतावनी 
तो, हमने जाना की शहद खराब नहीं होता है. हालांकि, शहद में कुछ विषाणु हो सकते है. यह वयस्कों और एक वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों के लिए हानिकारक नहीं है, क्योंकि इनके जठर और पाचनशक्ति स्वस्थ और काफी परिपक्व होती हैं. लेकिन एक साल से कम उम्र के बच्चों को विषाणु बाधित होने का खतरा होता है, इसलिए आपके शिशु को शहद नहीं देना चाहिए.

कच्चा शहद (Raw honey)
कच्चे शहद को सर्वोत्तम शहद के रूप वर्णित किया जाता है “क्योंकि यह मधुमक्खी के छत्ते में मौजूद होता है”. कच्चे शहद में विभिन्न प्रकार के पोषक तत्व होते हैं. छत्ते से शहद निकालकर जाली या नायलॉन के कपडे में से छानकर इसमें से मृत मधुमक्खियां और अशुद्ध घटक अलग किये जाते हैं. इसे अच्छे से छानकर खाने के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है. इसके अलावा इसे किसी भी अन्य फिल्टर प्रक्रिया से नहीं गुजारा जाता. इसीलिए यह सबसे शुद्ध माना जाता है.

नियमित शहद (Regular honey)
नियमित शहद को बहुत सारे मशीनी प्रक्रियाओं से गुजारा जाता है. इसे बोतलबंद होने से पहले कई बार पाश्चराइज्ड और फिल्टर किया जाता है. पाश्चराइजेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमे शहद को उच्य तापमान पर गरम कर के इसमें से यीस्ट नष्ट कर दिया जाता है, ताकि यह लंबे समय तक इस्तेमाल में लाया जा सके. मशीनी प्रक्रियाओं से कई बार अल्ट्राफिल्ट्रेशन करने से शहद में मौजूद फायदेमंद पोषक तत्वों का नाश भी होता है. इसके अलावा, कुछ निर्माता लागत कम करने के लिए शहद में चीनी भी मिलते हैं.

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