Category: Informative

सभी वेद, उपवेद, वेदांग के नाम अब करे चुटकियों में याद (Remember the names of all the Vedas, Upavedas, Vedangas quickly) 0

सभी वेद, उपवेद, वेदांग के नाम अब करे चुटकियों में याद (Remember the names of all the Vedas, Upavedas, Vedangas quickly)

हम में कई लोगों को अक्सर वेद, उपवेद, और वेदांग से लेकर मने में भ्रम की स्थिति बन जाती है. हम अक्सर आसानी से याद नहीं कर पाते की कोनसा वेद, उपवेद, और वेदांग है, भलेही इनके नाम हमने कई बार सुने होते है लेकिन हम इन्हें सही ढंग से...

किसी स्थान का पिन कोड कैसे तय किया जाता है? (How the pin code of a place is decided?) 0

किसी स्थान का पिन कोड कैसे तय किया जाता है? (How the pin code of a place is decided?)

आज भले ही पत्र लिखना या चिट्टी लिखना अतीत की बात हो गई है और इसी के साथ पिन कोड का उपयोग भी कम हो गया है जो की पत्र प्राप्तकर्ताओं के पते का एक अहम हिस्सा था, लेकिन हमारी ऑनलाइन खरीदारी की आदत ने पिन कोड को अप्रचलित होने...

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चाणक्य नीति ( हिंदी में ): सत्रहवां अध्याय – Chanakya Neeti (In Hindi): Chapter Seventeenth

१. वह विद्वान जिसने असंख्य किताबों का अध्ययन बिना सदगुरु के आशीर्वाद से कर लिया वह विद्वानों की सभा में एक सच्चे विद्वान के रूप में नहीं चमकता है. उसी प्रकार जिस प्रकार एक अनौरस संतान को दुनिया में कोई प्रतिष्ठा प्राप्त नहीं होती. 1. The scholar who has acquired...

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चाणक्य नीति ( हिंदी में ): सोलहवां अध्याय – Chanakya Neeti (In Hindi): Chapter Sixteenth

१. एक दुराचारी महिला का हृदय एकबद्ध नहीं होता है; यह विभाजित होता है. जब वह एक आदमी से बात करती है तो दूसरे की ओर वासना से देखती है और मन में तीसरे को चाहती है. 1. The heart of a vicious woman is not united; it is divided....

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चाणक्य नीति ( हिंदी में ): पन्द्रहवां अध्याय – Chanakya Neeti (In Hindi): Chapter Fifteenth

१. वह व्यक्ति जिसका हृदय हर प्राणी मात्र के प्रति करुणा से पिघलता है. उसे जरुरत क्या है किसी ज्ञान की, मुक्ति की, सर के ऊपर जटाजूट रखने की और अपने शरीर पर राख मलने की. 1. For one whose heart melts with compassion for all creatures; what is the...

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चाणक्य नीति ( हिंदी में ): चौदहवां अध्याय – Chanakya Neeti (In Hindi): Chapter Fourteenth

१. गरीबी, दुःख और एक बंदी का जीवन यह सब व्यक्ति के किए हुए पापों का ही फल है. 1. Poverty, disease, sorrow, imprisonment and other evils are the fruits borne by the tree of one’s own sins. २. आप दौलत, मित्र, पत्नी और राज्य गंवाकर वापस पा सकते है...

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चाणक्य नीति ( हिंदी में ): तेरहवां अध्याय – Chanakya Neeti (In Hindi): Chapter Thirteenth

१. यदि आदमी एक पल के लिए भी जिए तो भी उस पल को वह शुभ कर्म करने में खर्च करे. एक कल्प तक जी कर कोई लाभ नहीं. दोनों लोक, इस लोक और पर-लोक में पीड़ा होती है. 1. A man may live but for a moment, but that...

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चाणक्य नीति ( हिंदी में ): बारहवां अध्याय – Chanakya Neeti (In Hindi): Chapter Twelfth

१. वह गृहस्थ भगवान की कृपा को पा चुका है जिसके घर में आनंददायी वातावरण है. जिसके बच्चे गुणी है. जिसकी पत्नी मधुर वाणी बोलती है. जिसके पास अपनी जरूरते पूरा करने के लिए पर्याप्त धन है. जो अपनी पत्नी से सुखद सम्बन्ध रखता है. जिसके नौकर उसका कहा मानते...

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चाणक्य नीति ( हिंदी में ): ग्यारहवां अध्याय – Chanakya Neeti (In Hindi): Chapter Eleventh

१. उदारता, वचनों में मधुरता, साहस, आचरण में विवेक ये बातें कोई पा नहीं सकता ये जन्मजात गुण हैं. 1. Generosity, pleasing address, courage and propriety of conduct are not acquired, but are inbred qualities. २. जो अपने समुदाय को छोड़कर दूसरे समाज को जा मिलता है, वह उसी राजा...

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चाणक्य नीति ( हिंदी में ): दसवां अध्याय – Chanakya Neeti (In Hindi): Chapter Tenth

१. जिसके पास धन नहीं है वो गरीब नहीं है, वह तो असल में धनी है, यदि उसके पास विद्या है. लेकिन जिसके पास विद्या नहीं है वह तो सब प्रकार से निर्धन है. 1. One destitute of wealth is not destitute, he is indeed rich (if he is learned);...