भारत की सबसे बड़ी जनजाति कौन सी है? Which is the largest tribe in India?

Bharat Ki Sabse Badi Janjati Kaun Si Hain

Largest tribe in India in Hindi – जैसा कि हम सभी जानते हैं, भारत एक विविधतापूर्ण देश है जिसमें प्राचीन काल से ही कई विविध जातीय समूह (Ethnic groups) रहे हैं। इस विविधता में विभिन्न संस्कृतियाँ, रहन-सहन, भाषाएँ और जातियाँ देखी जा सकती हैं।

भारत में भले ही बहुत विविधता है लेकिन इसमें एकता भी बहुत है जो भारत को पूरी दुनिया में एक खास पहचान दिलाती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत दुनिया के सबसे बड़े देशों में गिना जाता है और भारत में दुनिया की सबसे ज्यादा जनजातियाँ रहती हैं।

अब अगर हम भारत की सबसे बड़ी जनजाति के बारे में बात करें तो भारत की सबसे बड़ी जनजाति कौन सी है? यह जानने से पहले आइए जानते हैं कि जनजाति क्या है? जनजाति असल में किसे कहते है?

जनजाति क्या है? जनजाति किसे कहते है?

जनजाति (Tribe) यह वास्तव में भारत के आदिवासियों के लिए प्रयोग किया जाने वाला शब्द है। यह एक ऐसा सामाजिक समुदाय है जो किसी भी राज्य या क्षेत्र के विकास से पहले भी भारत के वन क्षेत्र या अन्य स्थानों पर अस्तित्व में था।

भारत के संविधान में इनके लिए अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe) शब्द का प्रयोग किया गया है। हालाँकि, जनजाति के लिए अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग पर्यायवाची शब्दों का प्रयोग किया जाता है, जैसे आदिवासी, वन्य-जाति यानी वन में रहने वाली जाति, आदिम जाति, वनवासी, असभ्य जाति, अनपढ़, अशिक्षित, असाक्षर, निरक्षर, प्रागैतिहासिक, जंगली जाति आदि।

इनके कई नाम हो सकते हैं लेकिन इन सब का मतलब केवल एक ही होता है ऐसे लोग जो जंगल में रहते हैं, यानी जिनका किसी भी सामाजिक और राजनीतिक तथ्य से कोई संबंध नहीं होता है।

लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप किसी को सिर्फ इसलिए आदिवासी या वनवासी कह सकते हैं क्योंकि वह वन क्षेत्र में रहता है। जनजातियों को परिभाषित और अलग करने के लिए भौगोलिक, भाषाई, सांस्कृतिक, राजनीतिक परिस्थितियों का भी ध्यान रखा जाता है।

भारत की सबसे बड़ी जनजाति – Bharat Ki Sabse Badi Janjati

2011 की जनगणना के अनुसार भील (Bhil) भारत का सबसे बड़ा आदिवासी समूह (Tribal group) है। इस जनगणना के अनुसार, पूरे भारत में भील जनजाति के 16,908,907 सदस्य फैले हुए हैं यानि 2011 की जनसंख्या का 8.6 प्रतिशत भाग, जिनमें 8,620,117 पुरुष और 8,450,932 महिलाएं हैं। 

यह गणना 2011 के मुताबिक है इसलिए समय के साथ-साथ इनकी संख्या में बढ़ोतरी भी देखने को मिलेगी।

यह जनजाति भारत के उत्तर, दक्षिण और मध्य क्षेत्रों में प्रमुख है। ये आदिवासी समूह भारत की कुल अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe) आबादी का लगभग 38% हिस्सा हैं। 

भील जनजाति महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश के साथ-साथ त्रिपुरा में भी पाई जाती है। इस जनजाति द्वारा बोली जाने वाली भाषा भील (Bhil language) है लेकिन वे मराठी और गुजराती जैसी अन्य भाषाएँ भी बोलते हैं।

इतिहासकारों के अनुसार प्राचीन काल में भील जनजाति के लोग मिस्र से लेकर श्री लंका तक फैले हुए थे। भील जनजाति के लोग प्राचीन काल के राजवंशों में भी गिने जाते थे, जो पहाड़ी इलाकों पर शासन किया करते थे।

प्रत्येक जनजाति की अपनी संस्कृति और परंपराएँ होती हैं, परिणामस्वरूप, आदिवासी लोगों का बहुत कम विकास हुआ है। आमतौर पर देखा जाता है कि यह जनजाति आधुनिकता से ज्यादा जुड़ी नहीं है और ये अपने पारंपरिक तरीकों से ही जीवन यापन करते हैं। 

भारत सरकार उनके विकास को बढ़ावा देने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है और लगभग सभी सरकारी क्षेत्रों में जनजाति के लोगों को विशेष छूट दी जाती है।

भारत की अन्य सबसे बड़ी जनजातियां

इसके बाद दूसरा नाम गोंड (Gond Tribe) है जो मध्य प्रदेश की सबसे बड़ी जनजाति है। मध्य प्रदेश में जनजातियों की जनसंख्या सबसे अधिक है, जिसमें पहला नाम गोंड और दूसरा भील है।

यदि भारत के सभी राज्यों की सभी जनजातियों की गणना की जाए तो भारत में कुल 705 जनजातियाँ प्रमुखता से निवास करती हैं, जो किसी एक देश में सबसे अधिक है।

जनसंख्या के आधार पर भारत की प्रमुख जनजातियों के नाम नीचे दिये गये हैं।

  1. भील
  2. गोंड
  3. संथाल
  4. बोड़ो
  5. नाइकडा
  6. ओराओं
  7. सुगाली
  8. गुज्जर
  9. मुंडा
  10. खोंड
  11. कोली महादेव
  12. सहरिया
  13. खासी
  14. कोल
  15. वर्ली
  16. कोकना
  17. कवर
  18. भुमीज
  19. लुशाई
  20. गारो
  21. कोया
  22. मिरी
  23. हलबा
  24. धरूया
  25. त्रिपुरी

इन जनजातियों की आधी से अधिक आबादी मध्य भारत में रहती है। इनमें मध्य प्रदेश (14.69%), महाराष्ट्र (10.08%), उड़ीसा (9.2%), राजस्थान (8.86%), गुजरात (8.55%), झारखंड (8.29%), छत्तीसगढ़ (7.5%) और आंध्र प्रदेश (5.7%) शामिल हैं। इस जनसंख्या का 89.97% ग्रामीण क्षेत्रों में और 10.03% शहरी क्षेत्रों में रहता है।

भारत के विभिन्न स्थानों में अलग-अलग जनजातियाँ निवास करती हैं, जिनमें से स्थानों के आधार पर कुछ प्रमुख जनजातियाँ इस प्रकार हैं।

  • उत्तराखंड – कोय, मारा, निति, भोटिया, थारू, खास
  • जम्मू-कश्मीर – गुज्जर, गद्दी, लद्दाखी, बक्करवाल
  • हिमाचल प्रदेश – गड्डी, कनोरा, लाहौली
  • गुजरात – भील, बंजारा, कोली, पटेलिया, डाफर, टोड़िया
  • केरल – मोपला, इरूला, पनियान, कादर, उराली
  • मध्य प्रदेश – वैगा, कोल, मुंडा, गोंड, अबूझमारिया, मुरिया, बिशनहार्न, गोंड खेरवाल असुर, भील, लम्बादी, बंजारा
  • मेघालय – जयंतिया, मिकिर, गारो, खासी
  • मिजोरम – चकमा, लुशाई, कुकी, लाखर, पावो, मीजो
  • राजस्थान – भील, बंजारा, कोली, मीणा, सहरिया, सांसी, गरासिया
  • तमिलनाडु – कोटा, टोडा, बड़गा, टोडकोटा
  • सिक्किम – लेपचा
  • त्रिपुरा – त्रिपुरी
  • झारखंड – भुइया, गोंड, सौरिया, भूमिज, संथाल, मुंडा, हो, ओरांव, बिरहोर, कोरबा असुर
  • अरुणाचल प्रदेश – मिश्मी, मिनयोंग, मिरिगेलोंग, अपतनी, मेजी, मोंपा, डबला, सुलुंग
  • असम – मिकिर, नागा, लुसाई, राभा, दिमारा, कोछारी वोडो, अबोर, आवो
  • आंध्र प्रदेश – चेंचुस, कौढस सावरा, गडवा, गोंड
  • पश्चिम बंगाल – संथाल, लेपचा, लोघा, भूमिज

ये भारत की कुछ प्रमुख जनजातियाँ हैं। भारत के संविधान में इन जनजातियों को अनुसूचित जनजाति (Scheduled Tribe) की श्रेणी में रखा गया है। इनमें से कुछ जनजातियाँ विलुप्त होने के कगार पर हैं, जिनके संरक्षण के लिए भारत सरकार पूरे प्रयास कर रही है।

भील कला क्या है? What is Bhil Art?

भारत में भील जनजातियों की जनजातीय कला को भील कला (Bhil art) कहा जाता है। इस जनजाति में कला का विषय साधारण दैनिक जीवन है। आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि इस कला में नीम की टहनियों को अपनी कला बनाने के लिए ब्रश के रूप में उपयोग किया जाता है और रंगद्रव्य पत्तियों और फूलों जैसी प्राकृतिक सामग्रियों से बनाए जाते हैं।

भील कला की सबसे दिलचस्प विशेषता छोटे-बड़े बिंदु हैं जो पूरी सादे पृष्ठभूमि को कवर करते हैं। इन बिंदुओं को सुंदर पैटर्न और रंगों में दोहराया जाता है और बिंदुओं के समूह को देवता या पूर्वजों का प्रतीक भी माना जाता है।

तो अब आप जान गए होंगे कि भारत की सबसे बड़ी जनजाति कौन सी है? प्रत्येक जनजातीय लोगों की अपनी पहनावे, भाषा और जीवन शैली होती है। सभी जनजातियों का अपना अलग-अलग धर्म होता है और वे अपने धर्म में अधिकतर प्रकृति की पूजा करते हैं।

लेकिन ब्रिटिश शासन के दौरान जनजाति के कई गरीब और पीड़ित लोगों को जबरन ईसाई धर्म में परिवर्तित कर दिया गया था। वहीं दूसरी ओर स्वतंत्र भारत में अधिकांश आबादी हिंदू धर्म को मानती है। तो दोस्तों आशा है कि यह पोस्ट आपके लिए जानकारीपूर्ण साबित हुयी होगी।

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