एक खूंखार सीरियल किलर जिसका सिर 1841 से संरक्षित रखा गया है (A dreaded serial killer whose head has been preserved since 1841)

A dreaded serial killer whose head has been preserved since 1841

दोस्तों, आपको प्राचीन मिस्र के “ममी” के बारे में तो पता ही होगा. “ममी” यानि मृत व्यक्ति के शरीर को खास प्रक्रिया द्वारा संरक्षित करने का एक तरीका है, जिसे प्राचीन मिस्र के द्वारा विकसित किया गया था. पुर्तगाल में लिस्बन शहर के विश्वविद्यालय में भी दिओगो अल्वेस नाम के एक सीरियल किलर का सिर 1841 से आजतक संरक्षित किया गया है. दरअसल दिओगो अल्वेस एक नौजवान था जो काम की तलाश में लिस्बन आया था, लेकिन पुर्तगाल का सबसे खूंखार सीरियल किलर बन गया. आइए जानते है दिओगो अल्वेस की पूरी कहानी.

दिओगो अल्वेस पुर्तगाल का एक बहुत प्रसिद्ध शख्स है, लेकिन किसी अच्छे कारणों के लिए नहीं, बल्कि अपने भयानक आपराधिक कारनामों की वजह से. डिओगो अल्वेस के अपराधों में सत्तर से अधिक लोगों हत्याएं और डकैतियां शामिल है. 

डिओगो अल्वेस का जन्म 1810 में गालिजा के एक छोटे शहर में हुआ था. वह बहुत कम उम्र में काम के तलाश में पुर्तगाल के लिस्बन शहर में आया था. कहते है डिओगो ने काफी समय तक काम की तलाश की, लेकिन कम उम्र के कारण काम पाने में नाकामयाब रहा. इसके चलते उसने अपराध के दुनिया में कदम रखा और बन गया एक सीरियल किलर. 

पुर्तगाल में “एक्वाडुटो दास ओगुअस लिवरेस” नाम की एक प्रसिद्ध नहर है, यह वह जगह है जहां डिओगो अल्वेस ने 1836 में अपने अधिकांश अपराधों को अंजाम दिया था. इस लिए उसे “एक्वाडुटो दास ओगुअस लिवरेस” के हत्यारे के रूप में जाना जाता है. वास्तव यह कल्पना करना मुश्किल है की उसने कितने लोगों को मौत के घाट उतार डाला. वह पुर्तगाल में मृत्युदंड की सजा पाने वाला अंतिम व्यक्ति होने के साथ ही पुर्तगाल का सबसे पहला सीरियल किलर होने के लिए भी प्रसिद्ध है.

डिओगो अल्वेस लोगों को लूट कर उनके आंखो पर पट्टी बांध देता था और फिर उन्हें नहर पर बने पुल पर ले जा जाता था और वहा से निचे नदी में फेंक देता था. इसी तरह एक ही स्थान से उसने कई लोगों मार डाला. 

दरअसल 1820 की ऐतिहासिक लिबरल क्रांति को कुछ ही समय बिता था जिस के बाद पुर्तगाली लोगों पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ा. देश राजनीतिक और आर्थिक संकट से गुजर रहा था. देश के गरीब किसान और निम्न सामाजिक वर्गों को भूख और वित्तीय कठिनाइयों से निपटना पड रहा था. इसलिए, पुलिस और अधिकारियों ने सोचा की लोग आर्थिक तंगी के कारण पुल से कूद कर आत्महत्या कर रहे हैं. यही वजह की पुलिस को कभी किसी घातपात का शक नहीं हुआ. 

यह माना जाता है कि डिओगो अल्वेस ने साल 1837 के वर्ष तक, लगभग सत्तर लोगों को क्रूरता से मार डाला. 

जब नदी से कुछ ऐसे शव बरामद होने लगे, जिनके शरीर पर धारदार हथियारों के निशान थे, तब पुलिस और लोगों ने संदेह करना शुरू कर दिया कि इतने सारे लोग मर रहे है, यह किसी बड़े घातपात के रंजिश का इशारा था. लोगों में डर का माहौल बन गया, और यह निर्णय लिया गया कि नहर को कुछ दिनों के लिए बंद कर दिया जाएगा. यह वास्तव में कई दशकों तक बंद रहा.

पुलिस के हरकत में आते ही डिओगो ने लूटपाट बंद कर दी और तीन साल तक गुमनामी में चला गया. नहर के बंद होने के तीन साल बाद उसने  फिर से लूटपाट शुरू कर दी, डिओगो ने लोगों को लूटने और मारने के लिए एक नया स्थान ढूंढना शुरू कर दिया. डिओगो चालाक था, वह समझ गया था की वह अकेला कोई  बड़ी लूटपाट नहीं कर पाएगा. इसलिए डिओगो ने एक गिरोह बनाया और लोगों के घरों पर डकैती करता था, जहां वे परिवारों को लूटते और मारते देते थे. यही कारण है कि वह लिस्बन शहर के सीरियल किलर के रूप में जाना जाता है.

डिओगो ने अपने गिरोह के लिए काफी मात्रा में हथियार भी जुटा लिए थे, जिससे कि वह पुलिस का भी सामना कर सके. करीब एक साल तक डिओगो और उसके गिरोह ने अपने आतंक से दर्जनों लोगों को मौत के घाट उतारा. वह कभी भी किसी शिकार को जिंदा नहीं छोड़ते थे. लिस्बन पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें लोगों को क्रूरता से मारने में मजा आता था.

इधर पुलिस को डिओगो के गिरोह के बारे में पता चल गया था और पुलिस सतर्क हो गई थी. पुलिस ने गिरोह का पता लगाने के लिए छानबीन शुरू कर दी, लेकिन डिओगो अपने गिरोह के साथ रात में घटना को अंजाम देता था और दिन में अक्सर जंगल में छिपा रहता था. इसलिए पुलिस को आसानी से उसके ठिकाने का अता-पता नहीं मिल पा रहा था, जिसकी वजह से पुलिस डिओगो और उसके गिरोह तक नहीं पहुंच पा रहे थे. 

इसी दौरान एक दिन डिओगो ने अपने गिरोह के साथ लिस्बन के एक डॉक्टर के घर पर धावा बोला, जिसमे लूटपाट के बाद उसने डॉक्टर का भी बेरहमी से कत्ल कर दिया और फरार हो गया. पुलिस को जब इस घटना की जानकारी मिली तो पुलिस को शक हो गया कि डिओगो आसपास ही कहीं छिपा हुआ है. आखिरकार 1840 में कुछ दिनों बाद, वह अंततः पकड़ा गया. और 19 फरवरी 1941 को उसे 70 से अधिक व्यक्तियों की हत्या के आरोप में दोषी मानते हुए मृत्युदंड देने का फैसला किया गया, जो पुर्तगाल की आजतक की अंतिम फांसी की सजा थी.  

इसी दौरन पुर्तगाल में फ्रेनोलॉजी (मस्तिष्क-विज्ञान) अध्ययन का एक लोकप्रिय विषय था. फ्रेनोलॉजी एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी व्यक्ति के मनोवैज्ञानिक गुणों को निर्धारित करने के लिए मस्तिष्क कोशिकाओं की जांच और अवलोकन किया जाता है, जिससे व्यक्ति के व्यक्तित्व का पता लगाया जा सकता है. इसी वजह से, लिस्बन के कई वैज्ञानिक और डॉक्टरों ने कोर्ट से डिओगो का सिर अध्ययन के लिए देने की मांग की.

फांसी के बाद डिओगो के शरीर से सिर को अलग कर दिया और सिर को अच्छे से जतन कर कई वर्षों तक इसका अध्ययन किया. इसका उद्देश्य उन कारणों को समझना था जिन्होंने उसे इतने लोगों को मारने के लिए प्रेरित किया था. अध्ययन के बाद भी डिओगा का सिर हमेशा के लिए जतन कर दिया गया, जो आज भी लिस्बन की यूनिवर्सिटी में रखा हुआ है.

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